इंदौर, प्रदीप चौधरी। – इंदौर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद शहर की सियासत में भूचाल आ गया है। खाती समाज के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कार्यालय के बाहर जोरदार हंगामा किया, सुमित मिश्रा के पोस्टर पर कालिख पोती और उनका पुतला जलाया। नई कार्यकारिणी में खाती समाज को कोई स्थान न मिलने से नाराज समाज ने इसे ‘अनुशासन की गरिमा को तार-तार’ करने वाला कदम बताया। इस प्रदर्शन में 15-20 कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफे की घोषणा भी की, जिसने बीजेपी के लिए संकट की घंटी बजा दी है। ‘सहमति की सूची’ बनी विवाद की जड़नौ महीने पहले नगर अध्यक्ष बने सुमित मिश्रा ने अपनी नई टीम का ऐलान किया, जिसे उन्होंने ‘सर्वसम्मति’ से तैयार बताया था। लेकिन खाती समाज को इसमें शामिल न किए जाने से विवाद ने तूल पकड़ लिया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सुमित मिश्रा पर समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग ‘सुमित मिश्रा वापस जाओ’ के नारे लगाते दिखे। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे ‘संगठन में भेदभाव’ करार देते हुए भोपाल और दिल्ली तक शिकायत पहुंचाने की बात कही। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले ने बीजेपी आलाकमान की नींद उड़ा दी है। सुमित मिश्रा और संगठन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि भोपाल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई गई है। खाती समाज ने खारिज किया BJP कार्यालय पर प्रदर्शन का दावा भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर हुए कथित विरोध प्रदर्शन को लेकर खाती समाज के पूर्व राष्ट्रीय पदाधिकारी किशोर चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह समाज का सामूहिक प्रदर्शन नहीं था। उन्होंने कहा, “यदि खाती समाज का होता, तो सभी पदाधिकारी और जिले-नगर के समाजजन एकजुट होकर भाग लेते, हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरते।”चौधरी के अनुसार, यह असंतुष्ट व्यक्तियों का कार्य था, जो नई कार्यकारिणी से नाराज हैं और पदों से वंचित रहे। “खाती समाज सहिष्णु है, उग्रता में विश्वास नहीं करता। हम अपनी बात ज्ञापन के जरिए BJP प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री व संगठन मंत्री तक पहुंचाते हैं।” इस बयान से साफ है कि प्रदर्शन को समाज का नाम देकर गलत प्रचार किया जा रहा है। View this post on Instagram स्वाति काशिद की नियुक्ति ने डाला तेलविवाद तब और गहरा गया, जब नई कार्यकारिणी में स्वाति काशिद को नगर मंत्री बनाया गया। स्वाति के पति पर गुंडागर्दी के पुराने आरोप हैं, और नगर निगम चुनाव में उनका टिकट 16 घंटे की जद्दोजहद के बाद तय हुआ था। उनकी नियुक्ति पर सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “गुंडों को बढ़ावा देने वाली बीजेपी अब अनुशासन की बात कैसे करेगी?” View this post on Instagram कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए बीजेपी पर तंज कसा। कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने कहा, “यह वही बीजेपी है जो हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाती थी। अब उनके अपने घर में आग लगी है।”खाती समाज का गुस्सा, बीजेपी के लिए खतरे की घंटीखाती समाज लंबे समय से बीजेपी का मजबूत वोट बैंक रहा है। 2023 के विधानसभा चुनावों में भी समाज ने टिकट वितरण को लेकर नाराजगी जताई थी। इस बार कार्यकारिणी में उपेक्षा ने समाज को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया। प्रदर्शन के दौरान बीजेपी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर इस घटना ने तूल पकड़ लिया है, जहां #SumitMishra और #BJPIndore हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सुमित मिश्रा की गलती ने बीजेपी को इंदौर में मुश्किल में डाल दिया।” आगे क्या?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद बीजेपी के लिए आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में नुकसानदायक साबित हो सकता है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुमित मिश्रा इस तूफान को शांत कर पाएंगे या उनकी कुर्सी खतरे में है? फिलहाल, इंदौर की सियासत में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और सभी की नजरें बीजेपी आलाकमान के अगले कदम पर टिकी हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जबलपुर में चलती ट्रेन में शिक्षक की बेरहमी से हत्या: तलाक विवाद के बाद मामा ससुर ने धनबाद-उधना एक्सप्रेस में 30 से ज्यादा वार किए, ट्रेन से कूदकर फरार साहित्यकार डॉ श्रीकांत द्विवेदी की दो पुस्तकों का विमोचन