प्रदीप चौधरी। इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर हुआ दिल दहलाने वाला हादसा महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी, न्यायपालिका की उदासीनता और पुलिस की लापरवाही का खौफनाक परिणाम है। अंकित होटल से गीतांजलि अस्पताल तक के रास्ते में एक बेकाबू ट्रक ने मासूम लोगों की जिंदगियां रौंद दीं। कई परिवारों के सपने चकनाचूर हो गए, दर्जनों लोग मौत के मुंह में समा गए, और बाकी घायल अस्पतालों में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। सवाल उठता है—इस नरसंहार का जिम्मेदार कौन? View this post on Instagram सीसीटीवी फुटेज प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आज दिनांक 15.09.25 को एक ट्रक कालानी नगर से बड़ा गणपति की ओर आ रहा था तो उसके चालक द्वारा अनियंत्रित रूप से ट्रक चलाकर कुछ वाहनों को टक्कर मार दी, और आगे चलाते हुए बड़े गणपति के पास उक्त ट्रक में आग लग गई। उत्पन्न स्थिति पर काबू पा लिया है और चालक को हिरासत में ले लिया है। उक्त घटनाक्रम में अभी तक 2 लोगो की मृत्यु हो गई है और कुछ लोग घायल हुए है जिनका ईलाज जारी है। View this post on Instagram पुलिस का पूरा ध्यान चालान काटने और हेलमेट के नाम पर जनता को परेशान करने में लगा है। नशे में धुत ड्राइवरों पर नकेल कसना, भारी वाहनों की जांच, ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करना—ये सब उनके लिए गौण हैं। सड़क सुरक्षा की जगह रिश्वतखोरी और चालानबाजी ही उनकी प्राथमिकता बन चुकी है। आखिर यह प्रशासन कब अपनी जिम्मेदारी समझेगा? क्या आम आदमी की जान इतनी सस्ती है? न्यायपालिका भी इस त्रासदी में कम दोषी नहीं। सड़क सुरक्षा के लिए बार-बार याचिकाएं दायर होती हैं, मगर वे कागजी कार्रवाई तक सिमटकर रह जाती हैं। हेलमेट पहनने का आदेश देना आसान है, लेकिन सड़कों पर मौत को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की हिम्मत कोई नहीं दिखाता। माननीय अदालतें, कब तक जनता आपकी निष्क्रियता की सजा अपनी जान गंवाकर भुगतेगी? हादसे के बाद जनता का गुस्सा सड़कों पर उमड़ पड़ा। लोगों ने ट्रक को घेरकर आग के हवाले कर दिया। यह आग सिर्फ उस नशेड़ी ड्राइवर के खिलाफ नहीं थी, बल्कि उस पूरे सिस्टम के खिलाफ थी जो उसे बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ने देता है। यह आक्रोश प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका की सामूहिक विफलता का नतीजा था। इस हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। रिक्शे में सवार लोग अपने घरों को लौट रहे थे, लेकिन एक शराबी ड्राइवर और सिस्टम की लापरवाही ने उनकी सांसें छीन लीं। यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है, जिसका गुनहगार सिर्फ ड्राइवर नहीं, बल्कि पूरा नकारा तंत्र है। इंदौर की सड़कों पर अब रोज़ मौत का तांडव हो रहा है। जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देकर अपनी कुर्सियां बचाने में मशगूल हैं। जनता सवाल उठा रही है—क्या हेलमेट पहनने से हमारी जिंदगी सुरक्षित हो जाएगी? क्या पुलिस और अदालतें सिर्फ खानापूरी के लिए बनी हैं? इंदौर की इस त्रासदी ने सिस्टम की पोल खोल दी है। अगर अब भी यह तंत्र नहीं जागा, तो जनता का गुस्सा एक दिन ऐसा तूफान बनकर उभरेगा, जो प्रशासन और न्यायपालिका की नींव तक हिला देगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर मल्हारगंज में बड़ा हादसा: बड़े गणपति के पास पुल पर ट्रक में आग लगी, नो एंट्री से कैसे पहुंचा वाहन? पुलिस ने रोड बंद किया इंदौर में बेकाबू ट्रक ने मचाई तबाही, 3 की पुष्ट मौत, 15 से अधिक घायल; ड्राइवर नशे में धुत, ट्रक में लगी आग