भोपाल: मध्य प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं गरीबों, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए केवल “सांत्वना प्रमाणपत्र” बनकर रह गई हैं। 1.47 करोड़ बुजुर्ग, 1.02 करोड़ विधवाएं और 8.5 लाख दिव्यांग ₹300-₹500 मासिक पेंशन पर जीने को मजबूर हैं। यह राशि 13-18 साल से नहीं बढ़ी, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। दूसरी ओर, करोड़पति विधायकों की सैलरी ₹1.1 लाख से बढ़ाकर ₹1.6 लाख और पेंशन ₹70,000 करने का प्रस्ताव है। नाममात्र की मदद, रोज़ ₹10-15 का गुजारा40-79 साल की विधवाओं को ₹300 और 80 साल से ऊपर वालों को ₹500 मिलते हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग भी इसी राशि पर निर्भर हैं। प्रति लाभार्थी को रोज़ केवल ₹10-15 मिलते हैं, जो खाने-दवाइयों के लिए नाकाफी हैं। सरकार ने पेंशन बढ़ाने या पात्रता उम्र घटाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा, जबकि बिहार जैसे राज्य ₹700 तक दे रहे हैं। करोड़पति विधायक बनाम गरीब जनता230 में से 205 विधायक करोड़पति हैं, जिनमें 102 की संपत्ति ₹5 करोड़ से ज्यादा है। विधायकों को मुफ्त 10,000 किमी एसी रेल यात्रा, ₹2,500 प्रति मीटिंग भत्ता, और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। मुख्यमंत्री को ₹2 लाख, कैबिनेट मंत्री को ₹1.7 लाख और स्पीकर को ₹1.87 लाख मासिक वेतन मिलता है। सभी दल सैलरी बढ़ाने पर सहमत हैं, लेकिन गरीबों की पेंशन पर खामोश हैं। सामाजिक अन्याय का चरमजब गरीब जनता ₹300 पर गुजारा कर रही है, तब विधायकों की सैलरी और सुविधाओं में बढ़ोतरी का प्रस्ताव सामाजिक अन्याय का सबसे बड़ा उदाहरण है। जनता मांग कर रही है कि पेंशन को कम से कम ₹1,000-₹1,500 किया जाए और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। क्या सरकार इस क्रूर मजाक को खत्म करेगी? View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बड़ी खबर. यूट्यूब पर नागरिक परिक्रमा(संजय पराते की राजनैतिक टिप्पणियां)