इंदौर: प्रदीप चौधरी/ अंकुल प्रताप सिंह. इंदौर शहर के मालवा मिल से रसोमा चौराहे तक प्रस्तावित फ्लाईओवर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि क्या वाकई इस मार्ग पर फ्लाईओवर की आवश्यकता है? उनका मानना है कि अगर प्रशासन और नगर निगम अतिक्रमण हटाकर ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त कर दे, तो बिना भारी-भरकम खर्च के भी इस क्षेत्र में यातायात सुगम हो सकता है। नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए 18 लाख रुपये में सर्वे का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फ्लाईओवर न केवल उनके व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेगा, बल्कि उनकी संपत्तियों और घरों को भी नुकसान पहुंचाएगा। निवासियों का तर्क है कि फ्लाईओवर बनने से सूरज की रोशनी तक उनके घरों तक नहीं पहुंच पाएगी, जिससे उनकी दिनचर्या पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, व्यापारियों को डर है कि इस निर्माण से उनकी दुकानों और व्यवसायों को भारी नुकसान होगा। View this post on Instagram अतिक्रमण हटाने से हो सकता है समाधानस्थानीय लोगों का सुझाव है कि मालवा मिल से रसोमा चौराहे तक ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए अतिक्रमण हटाना और सड़क व्यवस्था को बेहतर करना काफी है। उनका कहना है कि अगर सड़कों पर अवैध निर्माण और रुकावटों को हटा दिया जाए, तो बिना फ्लाईओवर के भी ट्रैफिक सुचारु हो सकता है। लेकिन नगर निगम का ध्यान केवल करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट पर है, जिसे लेकर निवासियों में रोष है। पुरानी बस्तियों में बदलाव की जरूरत?निवासियों का यह भी सवाल है कि आखिर पुरानी बस्तियों और इमारतों को बदलकर नगर निगम क्या साबित करना चाहता है? उनका कहना है कि अगर फ्लाईओवर बनाना ही है, तो इसे उन क्षेत्रों में बनाया जाए जहां नया डेवलपमेंट हो रहा है और भविष्य में इंदौर का विस्तार होगा। पुरानी बस्तियों में इस तरह के बड़े निर्माण से केवल रहवासियों को परेशानी होगी। पाटनीपुरा पुल: अधूरी परियोजना का सबकमालवा मिल से पाटनीपुरा के बीच में चल रहा पुल निर्माण कार्य इसका जीता-जागता उदाहरण है। तकरीबन 100 दिन बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। निवासियों का कहना है कि निगम हर बार नई परियोजनाओं की “आफत की पुड़िया” लेकर आता है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। विरोध में चुप्पी, लेकिन असंतोष गहराहालांकि व्यापारी और रहवासी इस फ्लाईओवर का खुलकर विरोध करने से कतरा रहे हैं, लेकिन उनकी नाराजगी साफ झलक रही है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यहां कहावत चलती है—जिसकी लाठी, उसकी भैंस।” लोग मजबूरी में चुप हैं, लेकिन उनकी चिंता और असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्या है समाधान?निवासियों का मानना है कि अगर नगर निगम ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए, जैसे अतिक्रमण हटाना, सड़कों का चौड़ीकरण और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट, तो फ्लाईओवर जैसे महंगे प्रोजेक्ट की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और निगम जनता की आवाज सुनेगा, या फिर अपनी मनमानी पर अड़ा रहेगा? यह तो वक्त ही बताएगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जलस्तर बढ़ने से यशवंत सागर के 2 गेट खोले गए, डाउनस्ट्रीम गांवों और उज्जैन डेम को सूचना इंदौर पुलिस की गुंडों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई, 1220 बदमाश चेक, 576 पर वैधानिक कार्रवाई