यह कहानी है इंदौर की बाराभाई कॉलोनी, छत्रीपुरा बस्ती एरिया के एक साधारण बालक सिद्धार्थ इशासरे की, जिसने अपने दृढ़ संकल्प, मेहनत और एक पुलिसकर्मी के मार्गदर्शन से अपने जीवन की दशा और दिशा को पूरी तरह बदल दिया। एक डरपोक बालक की शुरुआत वर्ष 2010-11 की बात है, जब 7-8 साल का सिद्धार्थ, उदास मन और डरते हुए इंदौर पुलिस के संजीवनी बाल मित्र केंद्र, थाना छत्रीपुरा पहुंचा। उसने हेड कांस्टेबल संजय सिंह राठौर से कांपते स्वर में कहा, “सर, मुझे आपकी कंप्यूटर क्लास में पढ़ना है।” सिद्धार्थ का डर और संकोच देखकर संजय सिंह राठौर ने बड़े स्नेह और अपनेपन के साथ उसके सिर पर हाथ फेरा, उसका हौसला बढ़ाया और उसे पढ़ाने व जीवन में आगे बढ़ाने का वादा किया। यह छोटी सी मुलाकात सिद्धार्थ के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।संघर्ष और मेहनत का सफर छत्रीपुरा बस्ती जैसे क्षेत्र में रहने वाला सिद्धार्थ आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच बड़ा हुआ। उसके परिवार में केवल वह और उसकी मां थीं। लेकिन संजय सिंह राठौर के मार्गदर्शन और प्रेरणा ने सिद्धार्थ के मन में कुछ कर गुजरने की ललक जगा दी। उसने मेहनत-मजदूरी के साथ अपनी पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा। संजीवनी बाल मित्र केंद्र में कंप्यूटर सीखने के साथ-साथ उसने अपनी स्कूली पढ़ाई को भी पूरी लगन और मेहनत से आगे बढ़ाया। संजय सिंह राठौर के निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उसे आत्मविश्वास दिया। सिद्धार्थ ने अपनी मेहनत को और गति दी और कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया। उसकी लगन और मेहनत रंग लाई, जब उसे पुणे की प्रतिष्ठित कंपनी टाटा टेक्नोलॉजी में नौकरी मिली। इस नौकरी के साथ उसे प्रारंभिक पैकेज के रूप में 7 लाख रुपये से अधिक का वेतन प्राप्त हुआ। आज सिद्धार्थ अपनी मां को अपने साथ पुणे में रखता है और उन्हें हर सुख-सुविधा प्रदान करता है। इस तरह, एक साधारण बस्ती का बालक अपनी मेहनत और मार्गदर्शन के बल पर अपने परिवार के सपनों को साकार करने में सफल हुआ।गुरु के प्रति कृतज्ञतासिद्धार्थ आज भी अपने गुरु, हेड कांस्टेबल संजय सिंह राठौर को नहीं भूलता। जब भी वह इंदौर आता है, अपने सर से मिलने जरूर जाता है और उनका आशीर्वाद लेता है। एक वीडियो संदेश में सिद्धार्थ ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा, “मेरे सर संजय राठौर की तरह हर व्यक्ति को दया और सहानुभूति का भाव रखना चाहिए। अगर आपके आसपास कोई जरूरतमंद है, तो उसकी मदद करने का मौका कभी न चूकें। इससे न केवल उनकी जिंदगी बदल सकती है, बल्कि वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।” संजय राठौर: सैकड़ों बच्चों के प्रेरणास्रोत संजय सिंह राठौर के मार्गदर्शन में संजीवनी बाल मित्र केंद्र ने 6000 से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया है। सिद्धार्थ जैसे सैकड़ों बच्चे, जो कभी संसाधनों और अवसरों की कमी से जूझ रहे थे, आज अपने क्षेत्रों में सफलता की कहानियां लिख रहे हैं। ये बच्चे समय-समय पर अपने प्रिय सर से मिलने आते हैं और उनकी प्रेरणा को अपनी उपलब्धियों का आधार मानते हैं। सिद्धार्थ इशासरे की कहानी यह सिखाती है कि अगर मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है। संजय सिंह राठौर जैसे लोग समाज के लिए एक मिसाल हैं, जो निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद बच्चों को नई दिशा दिखाते हैं। धन्यवाद संजय राठौर सर और धन्यवाद इंदौर पुलिस, जिनके प्रयासों से न जाने कितने सिद्धार्थ अपने जीवन में नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। 🌳🌳🌳🙏🙏🌳🌳🌳 संजीवनी बाल मित्र केंद्र, इंदौर: एक सामाजिक क्रांति का प्रतीकसंजीवनी बाल मित्र केंद्र, इंदौर पुलिस की एक अनूठी पहल है, जो छत्रीपुरा थाना क्षेत्र में संचालित है। यह केंद्र आर्थिक रूप से वंचित और सामाजिक रूप से उपेक्षित बच्चों को शिक्षा, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करने का एक मंच है। इसका उद्देश्य बस्ती क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर भविष्य की ओर ले जाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। केंद्र का संचालन इंदौर पुलिस के सहयोग से एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) “संजीवनी” के तहत किया जाता है।स्थापना और उद्देश्यसंजीवनी बाल मित्र केंद्र की स्थापना वर्ष 2010 के आसपास हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बस्ती क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा, कंप्यूटर प्रशिक्षण, और व्यक्तित्व विकास के अवसर प्रदान करना है। यह केंद्र उन बच्चों के लिए एक आशा की किरण है, जो आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। केंद्र का लक्ष्य बच्चों को न केवल शैक्षिक रूप से सशक्त बनाना है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, नैतिक मूल्य और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देना भी है। संचालन और गतिविधियाँशिक्षा और कोचिंग: केंद्र में 1200 से अधिक बच्चों को मुफ्त कोचिंग प्रदान की जाती है, जिसमें स्कूली शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शामिल है। लगभग 100 शिक्षक और स्वयंसेवक इस नेक कार्य में योगदान देते हैं।-कंप्यूटर प्रशिक्षण : बस्ती क्षेत्र के बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा एक बड़ा अवसर है, जो उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ता है और रोजगार के नए द्वार खोलता है।– मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता : केंद्र बच्चों को मनो-सामाजिक सहायता प्रदान करता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने डर व संकोच को दूर कर सकते हैं।– सांस्कृतिक और प्रेरणादायक गतिविधियाँ : समय-समय पर बच्चों के लिए प्रेरणादायक सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं, जो उनके समग्र विकास में मदद करती हैं। प्रमुख व्यक्तित्व: हेड कांस्टेबल संजय सिंह राठौरसंजीवनी बाल मित्र केंद्र की सफलता में हेड कांस्टेबल संजय सिंह राठौर का योगदान अतुलनीय है। उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन ने सैकड़ों बच्चों के जीवन को नई दिशा दी है। संजय राठौर न केवल बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उनके लिए एक गुरु, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका भी निभाते हैं। उनके प्रयासों से 6000 से अधिक बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं, जिनमें से कई आज अपने क्षेत्रों में सफलता की कहानियाँ लिख रहे हैं।प्रभाव और उपलब्धियाँ– 6000+ बच्चों का सशक्तिकरण : केंद्र ने अब तक 6000 से अधिक बच्चों को शिक्षा और मार्गदर्शन प्रदान किया है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर सकें।– सफलता की कहानियाँ : सिद्धार्थ इशासरे जैसे कई बच्चे, जो कभी आर्थिक तंगी में थे, आज टाटा टेक्नोलॉजी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम कर रहे हैं। ऐसे कई बच्चे समय-समय पर अपने गुरु संजय सिंह राठौर से मिलने आते हैं और अपनी उपलब्धियों का श्रेय केंद्र को देते हैं।– समुदाय पुलिसिंग का मॉडल : संजीवनी बाल मित्र केंद्र इंदौर पुलिस की समुदाय पुलिसिंग पहल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पुलिस और समाज के बीच विश्वास का सेतु बनाता है।सामाजिक प्रभावसंजीवनी बाल मित्र केंद्र केवल एक कोचिंग सेंटर नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक है। यह उन बच्चों को अवसर प्रदान करता है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। केंद्र ने बस्ती क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता का प्रसार किया है, जिससे न केवल बच्चों, बल्कि उनके परिवारों और समुदायों का भी उत्थान हुआ है।निष्कर्षसंजीवनी बाल मित्र केंद्र, इंदौर पुलिस की एक ऐसी पहल है, जो न केवल बच्चों के भविष्य को संवार रही है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का बीज भी बो रही है। संजय सिंह राठौर जैसे समर्पित व्यक्तियों और इंदौर पुलिस के सहयोग से यह केंद्र बस्ती क्षेत्रों के बच्चों के लिए आशा और अवसरों का प्रतीक बन चुका है। यह कहानी हमें सिखाती है कि शिक्षा, मार्गदर्शन और दया के छोटे-छोटे प्रयास मिलकर किसी के जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं।🌳🌳🌳🙏🙏🌳🌳🌳 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन चांदी की कीमत में लगातार इजाफा “MFIN द्वारा थांदला, झाबुआ में वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम का सफल आयोजन”