इंदौर। 27 मई । लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के 300 वीं जन्म जयंती वर्ष को संपूर्ण देश में उल्लास एवं उत्साह से मनाया गया। पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से सारा देश परिचित हो, इस उद्देश्य से अखिल भारतीय स्तर पर ‘लोकमाता अहिल्याबाई होलकर त्रिशताब्दी समारोह समिति’ का गठन किया गया ।पद्मविभूषण श्रीमती सोनल मानसिंह तथा पद्मभूषण श्रीमती सुमित्रा महाजन ने इस समिति के संरक्षक के रूप में अपनी सहमति प्रदान की । समिति की अध्यक्ष प्रख्यात शिक्षाविद् श्रीमती चंद्रकला पाड़ीया तथा कार्याध्यक्ष होल्कर राजवंश के श्री उदयसिंह राजे होलकर के मार्गदर्शन में वर्षभर लोकमाता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए । समिति में देशभर के प्रख्यात कलाकार, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता सम्मिलित हुए हैं। समिति के द्वारा वर्ष भर में अनेक कार्यशालाएँ, सेमिनार तथा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत की सभी प्रमुख भाषाओँ में लोकमाता के साहित्य का प्रकाशन हुआ ।लोकमाता के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के साथ तीर्थ स्थलों के चित्रों सहित एक कॉफ़ी टेबल बुक का भी प्रकाशन किया गया । ललितकलाओं जैसे संगीत, नाटक, चित्रकला आदि के माध्यम से देवी अहिल्याबाई के जीवन को जन जन तक पहुंचाया गया। View this post on Instagram ये आयोजन देश के प्रमुख महानगरों एवं विश्वविद्यालयों में संपन्न किये गए। हमें ज्ञात ही है कि देवी अहिल्याबाई ने देश भर के 100 से अधिक तीर्थस्थानों पर धर्मशालायें, बावड़ी, अन्न क्षेत्र आदि के निर्माण करवाए थे, उन स्थानों पर भी विशेष आयोजन हुए ।पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई के जीवन वृत्त के असंख्य पहलु हैं। त्रिशताब्दी समारोह समिति ने जिन बिंदुओं पर ध्यान केन्द्रित किया, वे इस प्रकार हैं –कुशल प्रशासक –देवी अहिल्याबाई समाज के तथाकथित वंचित वर्ग से आती थीं । साथ ही दुर्भाग्य से उन्हें वैधव्य प्राप्त हुआ था । ऐसी कठिन परिस्थिति के उपरान्त भी उन्होंने 30 वर्ष तक कुशलता से साम्राज्य का संचालन किया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य व उनकी कल्पनाओं के अनुरूप लोक कल्याणकारी राज्य व्यवस्था को साकार रूप दिया।अखिल भारतीय दृष्टि –विदेशी आक्रमणकारियों और मुगल साम्राज्य के कारण ध्वस्त हो चुके, भारत के तीर्थ स्थलों के पुनर्निर्माण करने के पीछे उनका उद्देश्य मात्र पुण्य लाभ प्राप्त करना ही नहीं, अपितु भारत की अस्मिता को पुनर्स्थापित करना था। वे मानती थी कि भारत की एकात्मता में तीर्थ यात्राओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है, किंतु तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं व सुरक्षा के अभाव के कारण देशभर से आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या निरंतर घट रही थी। तीर्थ स्थल भी उजाड़ तथा वीरान हो चुके थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने देश के 100 से अधिक तीर्थ स्थलों पर धर्मशालाओ, अन्नक्षेत्रों तथा जल संरचनाओं का निर्माण करवाया। गुलामी के कारण दुर्दशा को प्राप्त काशी विश्वनाथ तथा सोमनाथ मंदिर का भी पुनरुद्धार उन्होंने करवाया। देवी अहिल्याबाई द्वारा करवाए गए इन निर्माणों को भारत के मानचित्र पर देखने पर हम उनकी अखिल भारतीय दृष्टि से परिचित होते हैं। यह तीर्थ स्थान दक्षिण में रामेश्वरम से लेकर उत्तर में केदारनाथ तक तथा पश्चिम में सोमनाथ से लेकर पूर्व में जगन्नाथपुरी तक देखने को मिलते हैं।इतनी बड़ी संख्या में इतने अधिक स्थानों पर और इतने बड़े क्षेत्र में करवाए गए निर्माण कार्य का यह विश्व में एकमात्र उदाहरण है। इसमें विशेष बात यह है कि देवी अहिल्याबाई ने इन सारे कार्यों के लिए शासकीय धन का उपयोग नहीं किया। यह सारे कार्य उन्होंने अपने निजी धन से ही करवाए। होलकर वंश की यह कुल परंपरा है कि परिवार की महिला को उसके पति की आय का एक चतुर्थांश मिलता है। जिसे स्त्रीधन या खासगी धन कहा जाता है। देवी अहिल्याबाई ने इस धन से ही यह सारे निर्माण कार्य संपन्न करवाये।महिला सशक्तिकरण –महिला सशक्तिकरण के आवश्यक तत्वों में स्त्रीशिक्षा तथा स्वावलंबन हेतु उन्होंने अनेक सफल प्रयास किये। इस्लामी शासकों के कारण हिंदू समाज में आए दोष जैसे सतीप्रथा, दहेज, स्त्री को बाहर न निकलने देना आदि से भी मुक्ति दिलाने के लिए उन्होंने प्रयास आरंभ कर दिए थे। महेश्वर का साड़ी उद्योग उनकी दूर दृष्टि व कुशल प्रबंधन का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने युद्धों में हताहत सैनिकों की स्त्रियों के स्वावलंबन के लिए कौशल विकास, उत्पादन एवं उनके विपणन तथा ब्रांडिंग का उत्तम प्रबंध किया। महेश्वर का साड़ी उद्योग आज जगत विख्यात है। यह वर्ष (31 मई 2024 से 31 मई 2025) लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के जन्मजयंती का त्रिशताब्दी वर्ष के रूप में मनाया गया। इस निमित्त अखिल भारतीय स्तर पर लोकमाता अहिल्याबाई होलकर त्रिशताब्दी समारोह समिति का गठन गत वर्ष हुआ। इस समिति में विभिन्न क्षेत्रों से संबंध रखने वाले देश के प्रतिष्ठित कलाकार, खिलाड़ी, प्राध्यापक, उद्यमी, सेना के सेवानिवृत अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी आदि है। वर्तमान में इस समिति के माध्यम से पूरे देश में विभिन्न स्थानों पर इस निमित्त विविध आयोजन चलते रहे । मातोश्री के प्रेरणादाई जीवन के विभिन्न आयामों पर बड़ी संख्या के व्याख्यान, विश्विद्यालयों में शोध पत्रों के लेखन के साथ वृहद स्तर पर कार्यशालाएं, साथ ही विविध आयामों के वृहद सम्मेलन जिसमें युवा उद्यमी सम्मेलन, नेतृत्वकर्ता सम्मेलन, संत सम्मेलन, प्रबुद्ध मातृशक्ति सम्मेलन प्रमुख हैं। मातोश्री के लोकउद्धारक प्रशासन के साथ ही, संपूर्ण देश में उनके द्वारा कराए गए विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों से हम सभी परिचित हैं ही। महिलाओं को सबल, सक्षम, समर्थ और स्वावलंबी बनाने हेतु उनके द्वारा प्रारंभ किए प्रकल्प वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर भी प्रसिद्ध है। मां अहिल्या की नगरी इंदौर अपनी मातोश्री के त्रिशताब्दी समारोह के समापन के पावन अवसर को, नए संकल्प के प्रारंभ के रूप में सुनियोजित करना चाहती है। इस हेतु 300 मोहल्ला बैठकों के साथ मातृशक्ति के मध्य कुटुंब प्रबोधन, नागरिक बोध, पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। नागरिक बोध के साथ जन्मजयंती की पूर्व संध्या पर शहर के प्रमुख 34 चौराहों पर यातायात व्यवस्था मातृशक्ति द्वारा संभाली जायेगी। आज से ही चौराहे की साज सज्जा प्रारंभ होगी। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के चित्र एवं पताकाओं से चौराहे सजाए जाएंगे एवं 30 मई को इन चौराहों पर सायं 5 बजे से 7 बजे तक मातृशक्ति यातायात जागरूकता हेतु कार्य करेंगी । देश भर में चल रहे त्रिशताब्दि के समारोह के समापन के अवसर पर दिनांक 31 मई 2025, को सायं 5:30 बजे इंदौर में शहर की प्रबुद्ध एवं समाज का नेतृत्व करने वाली चयनित पांच हजार मातृशक्ति के एकत्रीकरण में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जी मुख्य अतिथि के रूप में एवं प्रख्यात लोक गायिका पद्मभूषण मालिनी अवस्थी जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भारत के समाजवादियों ने कैसे इसराइल की मदद की! (भाग -2, अंतिम किश्त) दिल्ली पुलिस की वर्दी में सोशल मीडिया रील्स बनाने पर सख्त कार्रवाई