भोपाल- मुस्ताअली बोहरा ।। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है। संविधान लागू होने के बाद से अब तक भारत के संविधान में 125 से अधिक संशोधन किए जा चुके हैं। सभी संसद में पारित किए गए हैं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के 17 साल के कार्यकाल के दौरान 17 बार संविधान में संशोधन किए गए। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकालों के दौरान क्रमश 28 बार और 10 बार संविधान में संशोधन किए गए हैं। दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। बहस के लिए आखिरी ड्राफ्ट के पहले किए गए 2000 संशोधन किए गए। सन 1948 में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान का मसौदा तैयार कर उसे संविधान सभा में प्रस्तुत किया। 26 नवंबर 1949 को संविधान का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हुआ और इसे अपनाया गया था। इस दरमियान 165 दिनों में 11 सत्र आयोजित किए गए थे। संविधान सभा के सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 में इस पर अपने हस्ताक्षर किए। कुल 284 सदस्यों ने संविधान पर अपने हस्ताक्षर किए थे, इनमें 15 महिलाएं भी शामिल थी। 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इस पर कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया गया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान देशभर में लागू किया गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। भारतीय संविधान का अंतिम मसौदा जो दुनिया में सबसे बड़ा है, 26 नवंबर 1949 को लगभग 2 साल, 11 महीने 17 दिन बाद अपनाया गया था। कानूनी रूप से इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी दिन को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी का दिन ही इसलिए चुना गया क्योंकि सन 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। पूरी दुनिया में भारत का ही संविधान ऐसा है जो हाथ से बने कागज पर हाथ से लिखा हुआ है। भारतीय संविधान में करीब 1 लाख 40 हजार शब्द हैं। दुनिया भर में भारतीय संविधान की प्रस्तावना को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ये भी दिलचस्प बात है कि संविधान टाइपिंग की बजाए पेन से लिखा गया है। संविधान की मूल प्रति हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है। इसे प्रेम बिहारी नारायण ने लिखा था। इसे लिखने के लिए श्री नारायण ने नंबर 303 के 254 पेन होल्डर निब का इस्तेमाल किया था। संविधान को लिखने में करीब 6 माह का वक्त लगा था। — किस देश से क्या लिया गयाभारत का संविधान दुनिया के कई देशों से प्रेरित है। संविधान में ब्रिटिश संसद के कई सारे अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से ली गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका से मौलिक अधिकार, निर्वाचित राष्ट्रपति और उस पर महाभियोग, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात, न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लिया गया है। ब्रिटेन से संसद की शासन प्रणाली, नागरिकता और विधि निर्माण प्रक्रिया, मंत्रीमंडल प्रणाली आदि को लिया गया है। आयरलैंड से नीति निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में अन्य क्षेत्र जैसे कला, साहित्य, विज्ञान, खेल आदि में दिग्गजों को नियुक्त करना लिया गया है। ऑस्ट्रेलिया से केन्द्र और राज्य के बीच संबंध और शक्तियों का विभाजन, प्रस्तावना की भाषा, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आदि को लिया गया है। आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति के मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां, आपातकाल के वक्त किन मूल अधिकारों का परिवर्तन होगा या आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों को खत्म कर देने से जुड़े कानून आदि जर्मनी से लिया गया है। संविधान संशोधन की प्रक्रिया, प्रावधान, राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन आदि दक्षिण अफ्रीका से लिया गया है। केन्द्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति, उच्च न्यायालय का परामर्श, अहम शक्तियां केन्द्र के पास रहें आदि कनाडा से लिया गया है। पंचवर्षीय योजनाएं और मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान सोवियत संघ से लिया गया था। जापान से सुप्रीम कोर्ट के संचालन के नियम और विधि द्वारा संविधान को स्थापित करने की प्रक्रिया ली गई है। फ्रांस से गणतंत्रात्मक और प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता, बंधुता के आदर्श का सिद्धांत आदि लिया गया है।— गैस चेम्बर में रखी है संविधान की मूल काॅपीसंसद में रखी है संविधान की मूल कॉपी। संविधान के हर पन्ने पर सोने की पत्तियों वाली फ्रेम बनी है। साथ ही हर अध्याय के आरंभिक पृष्ठ पर एक कलाकृति भी बनाई गई है। शांति निकेतन के कलाकारों ने इसके हर पन्ने को खास तरीके से सजाया। संविधान की मूल प्रति को पहले फलालेन के कपड़े में लपेटकर नेफ्थलीन बॉल्स के साथ रखा गया था लेकिन जांच के बाद पाया गया कि संविधान की प्रति यहां सुरक्षित नहीं थीं। सन 1994 में संसद भवन के पुस्तकालय में इसे वैज्ञानिक विधि से तैयार चेम्बर में सुरक्षित कर दिया गया। इसे और भी सुरक्षित बनाने के लिए चेम्बर में एयरटाइट गैस माॅनिटर लगाए गए हैं। इसके लिए ऐसी गैस की आवश्यकता थी जो कागज के साथ किसी भी तरह की प्रतिक्रिया न करती हो। चूंकि भारतीय संविधान काली स्याही से लिखा है, लिहाजा ये आसानी से उड़ सकती थी इसलिए नाइट्रोजन को सबसे उपयुक्त माना गया। सीसीटीवी कैमरे से इस पर लगातार निगरानी रहती है। हर दो महीने में संविधान की मूल प्रति की जांच परख की जाती है। ये भी दिलचस्प बात है कि संविधान के रचियता डॉ अंबेडकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा न होने की स्थिति में संविधान को जला देने के लिए भी तैयार हो गए थे। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सावित्री और फातिमा : एक अभिन्न जीवन धार्मिक 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