ये मुझसे किनारा ना किया करों,हाँ,मिलने का इशारा किया करों।इस ज़माने से भी तो थोड़ा डरो,कुछ हम पर भी तो रहम करों!आती है याद हौसले बुलंद करों। ये मुझसे किनारा ना किया करों,हाँ,मिलने का इशारा किया करों।होने दो ये अहसाँस थोड़ा-थोड़ा,अब कभी-भी बन जाएगा जोड़ा!यार मेरे इंतज़ार कर लें तू थोड़ा। ये मुझसे किनारा ना किया करों,हाँ,मिलने का इशारा किया करों।मैं तेरी एक झलक से परवान हूँ,करता हूँ इल्तज़ा कि निगेहबाँ हूँ!हाँ, अब मैं तेरा सिपहसालार हूँ। संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)मो. 98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन राजेंद्र शर्मा के तीन व्यंग्य मन के तार और अल्फाज़