प्रदीप चौधरी। । केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में कुछ ऐसी दवाइयो का खुलासा किया है, जो इलाज के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होती हैं । हालांकि, ये दवाएं क्वालिटी चेक में फेल हो गई हैं. इनमें कुछ ऐसी दवाएं शामिल हैं, जो हम लोग इस्तेमाल करते हैं. इनमें पैरासिटामोल, कैल्शियम और विटामिन डी की टैबलेट्स भी शामिल हैं.इनमें पैरासिटामोल, कैल्शियम और विटामिन डी की टैबलेट्स भी शामिल हैं. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन यानी CDSCO ने अपनी मंथली रिपोर्ट जारी की है. इसमें पैरासिटामोल सहित 53 दवाएं क्वालिटी चेक में फेल बताई गई हैं.क्वालिटी चेक में दवाएं फेलCDSCO ने जिन दवाइयों को फेल बताया है, उनमें पैंटोसिड टैबलेट भी शामिल है. यह दवा एसिड रिफ्लक्स के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है. यह दवा सनफार्मा कंपनी बनाती है. इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन डी की गोली भी क्वालिटी चेक पास नहीं कर पाई हैं. वहीं, शेलकल और पुल्मोसिल इंजेक्शन भी क्वालिटी चेक में फेल हो गए . ये हाई ब्लडप्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होते हैं। साथ ही, अल्केम हेल्थ साइंस के एंटीबायोटिक क्लेवम 625 भी दवा परीक्षण में विफल रही। सीडीएससीओ ने जारी की लिस्टCDSCO ने फर्जी, मिलावटी और गलत ब्रांडिंग वाली दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, टीकों और सौंदर्य प्रसाधनों की लिस्ट जारी की है. इनमें पल्मोसिल (सिल्डेनाफिल इंजेक्शन), पैंटोसिड (पैंटोप्राजोल टैबलेट आईपी), उर्सोकोल 300 (अर्सोडियोक्सीकोलिक एसिड गोलियां भारतीय फार्माकोपिया) शामिल । इसके अलावा उर्सोकोल 300 टैबलेट का सैंपल भी फेल हुआ, जो पित्ताशय की पथरी के इलाज में इस्तेमाल होती है । वहीं, लिवर की कुछ बीमारियों के इलाज में भी यह इस्तेमाल की जाती है. यह दवाई सन फार्मा कंपनी की है. टेल्मा एच (टेल्मिसार्टन 40 मिलीग्राम और हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड 12.5 मिलीग्राम टैबलेट आईपी), डेफ्लाजाकोर्ट टैबलेट (डेफकोर्ट 6 टैबलेट) भी परीक्षण में विफल रही। 48 दवाइयां भी अनफिटइनमें पैरासिटामोल, कैल्शियम और विटामिन डी की टैबलेट्स भी शामिल हैं.जानकारी के मुताबिक, इसके अलावा मानक गुणवत्ता में सही नहीं पाए जाने वाली 48 दवाइयों की लिस्ट भी cdsco ने जारी की है. इसके साथ ही जिन कंपनियों ने ये दवाइयां बनाई हैं, उन्होंने इस पर अपने बयान जारी कर दिए। स्टेबिलिटी स्टडी दवाओं पर लम्बे तक वातावरण का क्या असर पड़ता है? वो कैसे इसकी क्वालिटी को प्रभावित कर सकता है? इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं की एक बड़ी टीम स्टेबिलिटी स्टडी करती है। स्टडी से सामने आने वाले परिणामाें से सबक लेते हुए उसे गाइडलाइन का हिस्सा बनाया जाता है। क्या हैं FDA के WHO के मानक?अमेरिकी ड्रग रेग्युलेटर ने दवाओं के लिए जो गाइडलाइन तय की है, उसे करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस कहा जाता है। इसमें टेस्टिंग और दवा के प्रभाव की जांच की जाती है। इसके अलावा जेनेरिक ड्र्रग टेस्ट करने की बात कही गई। जिसमें दवा में मौजूद केमिकल, उनका डोज और उसकी पावर को चेक किया जाता है। यह भी देखा जाता है कि कंपनी किस तरह से उसकी लेबलिंग कर रही है। जैसे- उसे कौन-कौन खा सकता है और दुर्लभ स्थिति में कौन-कौन से साइड इफेक्ट हो सकते हैं. यह बताना भी जरूरी होता है। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने अंतरराष्ट्रीय मानक जारी किए हुए हैं। इसमें पहला टेस्ट है स्टेबिलिटी. इसका मतलब है, दवा में जो कम्पाउंड हैं वो उसकी पैकिंग और स्टोरेज प्रभावित नहीं होनी चाहिए. पैकिंंग ऐसी होनी चाहिए जो दवा को प्रभावित होने से बचाएं. दवा को कैसे स्टोर किया जाए कि उसका असर खत्म न हो, कंपनी के लिए यह बताना भी अनिवार्य । इसके अलावा गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के तहत दवाओं का निर्माण होना चाहिए,इसके मामले FDA जैसे ही है। ये दवाएं फेल हुईजो दवाएं फेल हुई हैं उनमें दर्द निवारक डिक्लोफेनेक, बुखार उतारने वाली पैरासिटामोल, एंटीफंगल मेडिसिन फ्लुकोनाजोल के अलावा सनफार्मा की पैन्टोसिड टैबलेट भी है. इसके अलावाकैल्शियम और विटामिन-डी की टेबलेट शेल्कल और पल्मोसिल इंजेक्शन, एल्केम हेल्थ साइंस की एंटीबायोटिक्स क्लैवम 625 शामिल हैं. भारत के ड्रग नियामक, CDSCO द्वारा अगस्त में किए गए गुणवत्ता परीक्षण में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, विटामिन, कैल्शियम डी3 सप्लीमेंट्स, बच्चों में बैक्टीरियल संक्रमण, एसिड रिफ्लक्स और पेट संक्रमण की कई दवाएं क्वालिटी स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतरीं हैं.बीते अगस्त में NSQ (गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं) पाई गई दवाओं में पैरासिटामोल टैबलेट्स (500 mg), एंटी-डायबिटिक दवा ग्लाइमेपिराइड, हाई ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मा H (टेल्मिसर्टान 40 mg), एसिड रिफ्लक्स की दवा Pan D, और कैल्शियम सप्लीमेंट्स शेल्कल C और D3 शामिल हैं. मेट्रोनिडाजोल, जिसे HAL द्वारा निर्मित किया गया, और शेल्कल, जिसे टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स द्वारा वितरित और उत्तराखंड स्थित Pure & Cure हेल्थकेयर द्वारा निर्मित किया गया, भी इन दवाओं में शामिल हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भोपाल में 72 घंटे बाद पानी की टंकी में मिला 6 साल की बच्ची का शव चोरी के आरोप में की पीटाई, सच जान पुलिस के उड़े होश