भोपाल, मप्र -मुस्ताअली बोहरा, अधिवक्ता एवं लेखक

किसी भी देश की ताकत का अंदाजा उस देश की करेंसी से लगाया जाता है। साल 2014 था जब नरेन्द्र मोदी से देश की बागडोर अपने हाथों में ली थी। तब एक डाॅलर की कीमत 58 रूपये के आसपास थी और आज एक डाॅलर 83 रूपये के आसपास है। रुपये की हालत इन दिनों काफी खराब है। निरंतर गिरावट की वजह से खराब रिकॉर्ड में भारतीय करेंसी यानि रूपये का नाम दर्ज हो गया है। पिछले महीने के दौरान रुपये का नाम एशिया की सबसे खराब करेंसी की लिस्ट में दूसरे नंबर पर आया है। अगस्त महीने में डॉलर के मुकाबले एशिया की ज्यादातर करेंसी मजबूत हुई हैं। सिर्फ भारतीय रुपये और बांग्लादेशी टका ही ऐसी दो करेंसी रही, जिसके भाव में डॉलर के मुकाबले गिरे हुए हैं। अगस्त में एशिया की सबसे खराब करेंसी बांग्लादेशी टका रहा उसके बाद रुपया दूसरे नंबर पर रहा। भारतीय करेंसी अभी डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो लेवल पर आई हुई है। पिछले सप्ताह के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 84 से भी नीचे तक गिरा हुआ था। अगस्त महीने के बाद सितंबर में भी रुपये में गिरावट जारी है। रूपये का लगातार अवमूल्यन सोचने-विचारने को मजबूर करता है। 
    दुनिया भर में अमेरिका को ताकतवर इसलिए ही माना जाता है क्योंकि ‘डॉलर’ का दुनिया भर में डंका बजता है। दुनिया के दिगर देश अपनी करेंसी की तुलना डॉलर से ही करते हैं। चूंकि वैश्विक बाजार में लेन-देन डाॅलर के जरिए ही होता है इसलिए डाॅलर की मांग भी ज्यादा होती है। मांग और आपूर्ति के नियम के हिसाब से ही किसी भी चीज की वैल्यू घटती बढ़ती रहती है। डाॅलर की मांग बनीं रहती है इसलिए उसकी वैल्यू भी बढ़ती रहती है। डाॅलर की ही तरह धीरे-धीरे भारतीय करेंसी रुपया भी अपनी डिमांड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ा रहा है। वर्तमान में रूस और श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान सहित कुछ खाड़ी और अन्य देशों में भी रुपये से पेमेंट किया जा रहा है। जैसे-जैसे रुपये की डिमांड बढ़ेगी वैसे ही रूपया भी मजबूत होगा। पिछले कुछ सालों में रुपये के वैल्यू में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रूपये के गिरने की भी कई वजह है मसलन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशों में डाॅलर की मजबूती, विदेशी पूंजी का फ्लो आदि। रूपये के कमजोर होने का असर आयात पर पड़ता है। यदि कोई वस्तु विदेश से मंहगे दाम पर आयात होंगी तो जाहिरी तौर पर वह देश में भी मंहगी मिलेंगी। तेल, गैस सहित अन्य खाद्य और पेय पदार्थ और कच्चा माल जो आयात होता है वह मंहगा हो जाता है। भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में अगर रुपये कमजोर होता है, तो भारत को ज्यादा रुपयों मे तेल खरीदना पड़ता है, क्योंकि आमतौर पर भारत क्रूड ऑयल की खरीद डॉलर में करता है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने पर भारत को महंगे कीमत में क्रूड ऑयल को आयात करना पड़ता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का अंदेशा रहता है। अगर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो फिर सब्जी से लेकर रोजमर्रा के उपयोग की चीजें मंहगी हो जातीं हैं। रुपये की गिरने से सरकार को विदेशों से किसी भी वस्तु को खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने होते हैं जिससे भारत का घाटा बढ़ जाता है। साथ ही विदेशी मुद्रा के भंडार में कमी होती है। यदि आयात अधिक और निर्यात कम है तो नुकसान होता है और इसकी भरपाई के लिए कर्ज लेना पड़ता है। इसलिए ये माना जाता है कि रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि रूपये गिरने से नुकसान ही होता है बल्कि कुछ क्षेत्रों में नफा भी होता है। जो वस्तुएं निर्यात की जाती हैं जैसे फार्मा और आईटी सेक्टर की चीजें तो उनमें अधिक मुनाफा होता है। जानकारो का मानना है कि डॉलर इसलिए भी मजबूत होता है क्योंकि दुनिया हर देश अपना रिजर्व डॉलर में रखता है यहां तक कि भारत भी। जब-जब रुपया कमजोर होता है तब-तब डॉलर में रखे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पैसे की कीमत बढ़ती है।
बहरहाल, रूपये की गिरावट पर अब सियासत भी तेज हो गई है। जिस तरह से तत्कालीन कांग्रेसनीत सरकार को रूपये की गिरावट पर तब गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं ने घेरा था ठीक उसी तर्ज पर अब मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। जो सवाल कभी मोदी पूछते थे अब वही सवाल उनसे ही पूछे जा रहे रहे हैं। इधर, भाजपा की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज का एक पुराना भाषण भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोकसभा में बहस के दौरान सुषमा स्वराज ने कहा था कि रुपया केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं होता। रुपया केवल एक करेंसी नहीं होती, इस करेंसी के साथ देश की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई होती है और जैसे-जैसे करेंसी गिरती है, देश की प्रतिष्ठा गिरती है। कांग्रेस की तत्कालीन सरकार को घेरते हुए सुषमा स्वराज ने कहा था कि मैं मांग करती हूं कि आज हमें प्रधानमंत्री से वक्तव्य चाहिए, देश के जाने माने अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री से इस सदन में वक्तव्य चाहिए। प्रधानमंत्री आएं और बताएं कि ये रुपया जिस तरह से गिर रहा है, क्या यह गिरना रुकेगा और रुकेगा तो उन्होंने इसके लिए क्या उपाय सोचे हैं। 

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