भोपाल, मप्र -मुस्ताअली बोहरा, अधिवक्ता एवं लेखक अभी कोलकाता की डाॅक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना से लोग उबरे भी नहीं थे कि साउथ फिल्म इंडस्ट्रीज के कई दिग्गजों पर यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं। बलात्कार, यौन शोषण आदि के मामले थमने की बजाए बढ़ते जा रहे हैं जिनके पीछे बड़ी वजह महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही शिथिलता है। निर्भया कांड के करीब बारह साल बाद भी बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। ये माना जा सकता है कि जब तक सरकारें राजनीतिक नफे-नुकसान से परे होकर इस दिशा में कोई कारगर और व्यावहारिक कदम नहीं उठाएंगी तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल ही होगा। कोलकाता से पहले भी हाथरस, मणिपुर, उन्नाव सहित अन्य राज्यों से भी बलात्कार के जघन्य मामले सामने आते रहे हैं। मध्यप्रदेश में भी नाबालिग बालिकाओं से रेप, अपहरण आदि की घटनाएं आती रहती हैं। जो लोग पश्चिम बंगाल की घटना पर रोष प्रकट कर रहे हैं उन्होंने हाथरस, उन्नाव, मणिपुर की घटनाओं पर चुप्पी क्यों साध रखी थी, ये सवाल भी कौंध रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कोलकाता की घटना पर कहा कि एक डाॅक्टर के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले ने देश को सकते में डाल दिया है। उन्होंने निर्भया कांड का भी जिक्र किया और देश में महिलाओं और नाबालिग बालिकाओं के साथ हो रहे बलात्कार के बारे भी उल्लेख किया। सवाल ये है कि आखिर ये केवल ऐसा अकेला मामला है बल्कि नहीं, महिलाओं के खिलाफ अपराधों की फेहरिस्त की एक कड़ी भर है।कोलकाता के आर.जी. मेडिकल कॉलेज की एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई। ये घटना निंदनीय है, डॉक्टरों ने इस घटना के विरोध में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता समेत पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए। डाॅक्टरों के विरोध प्रदर्शन से कई शहरों में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो गई। इस घटना के मुख्य आरोपी संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब इस मामले की विशेष जांच सीबीआई की टीम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर के रेप और हत्या मामले को संज्ञान में लिया है। कोलकाता की घटना और इसके विरोध में हो रहे प्रदर्शन से कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई है और जिसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे हर दिन, हर दो घंटे के बाद अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति के बारे में दिल्ली को रिपोर्ट दें। कोलकाता रेप और हत्या मामले पर केंद्र सरकार, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया और चिंता जताई।असल सवाल ये है कि मणिपुर, उन्नाव और हाथरस में भी इसी तरह के विभत्य मामले सामने आ चुके हैं लेकिन इन जगहों के मामलों को इतनी गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया। ये माना जाए कि ये मामला पश्चिम बंगाल का है, इसी वजह से केंद्र की इसमें इतनी दिलचस्पी हो गई है? बलात्कार और हत्या के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शन, हड़ताल, बंद आदि को लेकर देश की महामहिम तक का बयान आ गया। अब, केन्द्र और ममता बनर्जी दोनों ही एक बार फिर आमने-सामने हैं। दरअसल, ममता बनर्जी की सरकार ने बलात्कार और हत्या के मामले को भी गंभीरता से लिया। गंभीरता से जांच करते हुए कोलकाता पुलिस ने फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें नियुक्त कीं और आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पश्चिम बंगाल के इस मामले को लेकर देश भर में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी होने लगी और ममता सरकार को निशाने पर लिया जाने लगा है। महिला डॉक्टर से रेप और हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। लेकिन अब ये घटना राजनीतिक मुद्दा बन गई है। पश्चिम बंगाल के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी बलात्कार और हत्या के मामले सामने आते रहते हैं और संबंधित राज्य सरकार ऐसे मामलों में अपने स्तर पर कार्रवाई भी करती है। कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश और बिहार में कोलकाता जैसे मामले सामने आए हैं। हालांकि, पीड़ित महिला कोई डॉक्टर नहीं थी लेकिन उन्हें भी उसी तरह नोचा गया। मुजफ्फरपुर के पारू गांव से एक लड़की को घर में घुसकर अगवा किया गया। दो दिन बाद उसका शव गांव के बाहर एक तालाब में मिला। उस अभागी लड़की के शरीर पर घावों के कई निशान थे, लेकिन किसी ने इस अभागी लड़की के परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद नहीं की। हाथरस जैसे घटनाओं ने देश को शर्मसार किया है। पीड़िता का रात के अंधेरे में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया लेकिन तब किसी ने आवाज नहीं उठाई। बिहार और उत्तरप्रदेश में होने वाली बलात्कार की घटनाओं पर ना तो कोई कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है और ना ही सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेता है आखिर क्यों। महाराष्ट्र के संजय राठौड़ का मामला भी सामने आ चुका है। पीड़िता पूजा चव्हाण ने आत्महत्या कर ली थी और उस वक्त बीजेपी महिला मंडल ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। आज ये महोदय महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के साथ कदमताल कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों से मणिपुर की महिलाओं पर इन्तेहाई जुल्म हो रहे हैं। मणिपुर में मई 2023 को भड़के दंगों के बाद वहां आदिवासियों और सवर्ण मैतेई समुदाय के बीच हिंसा हुई थी जिसमें हजारों कुकी और दूसरे आदिवासियों को अपना घर-बार छोड़कर जाना पड़ा। कोई दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में आगजनी हुई थी। मणिपुर की हिंसा का दुनिया भर में जिक्र हुआ था। वहां दो आदिवासी महिलाओं को नग्न कर जुलूस निकाला गया, शायद बाद में गैंगरेप भी किया गया। आदिवासी महिलाओं की हत्या भी की गई। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लिया। मणिपुर में ही जख्मी बच्चे को लेकर अस्पताल जा रही महिला को मैतेई भीड़ ने एम्बुलेंस सहित जलाकर मार डाला था। महिलाओं को सड़कों पर नग्न करने, बलात्कार करने और यहां तक कि गोली तक मार दी गई इतना होने के बावजूद भी केंद्रीय गृह मंत्रालय, सीबीआई ने कोई कार्रवाई नहीं की। इतना सब होने के बावजूद देश की महामहिम ने कोई लेख नहीं लिखा। मणिपुर की व्यापक हिंसा, आदिवासी महिलाओं के खिलाफ जुल्म, हाथरस और उन्नाव की घटनाओं और कोलकाता के बलात्कार-हत्या के मामले, यानि लगातार महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं वो चिंताजनक हैं। खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए ऐसी घटनाओं ने चिंता और बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल में युवा डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या ने देश को झकझोर दिया लेकिन जब अन्य राज्यों में महिलाओं के साथ यौन दुव्र्यवहार, शोषण, अत्याचार, बलात्कार होता है तो चिंता क्यों दिखाई नहीं देती, सीबीआई की सक्रियता क्यों नजर नहीं आती, महामहिम का लेख क्यों नहीं आता ? बहरहाल, महिला अपराधों को रोकने के लिए सियासत के बजाए समाधान खोजा जाना जरूरी है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सीधी जिले में आया बंग्लादेशी युवक पुलिस ने पकड़ा न्यायालय में किया पेश फर्जी एडवाइज़री / शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली कंपनीयों पर निरंतर कार्यवाही जारी