भोपाल-मुस्ताअली बोहरा,अधिवक्ता एवं लेखक ये कैसी विडम्बना है कि जहां एक तरफ लाल किले की प्राचीर से देश में न्यायिक सुधार, 2047 में विकसित भारत और महिलाओं के खिलाफ अपराध में सजा की बात की जा रही थी तो दूसरी तरफ देश की बेटियां न्याय की मांग करते हुए आंदोलन कर रहीं थी। जश्न-ए-आजादी के बीच महिलाओं का ये आंदोलन कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर कब तक इसी तरह बलात्कार होते रहेंगे, कब तक ऐसे दरिंदे खुलेआम घूमते रहेंगे, कब तक महिला सुरक्षा को लेकर जबानी जमा खर्च होता रहेगा। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल काॅलेज एंड हाॅस्पिटल में लेडी डाॅक्टर के साथ हुई दरिंदगी ने हर किसी झकझोर दिया है। इसको लेकर देश भर गुस्सा है। विपक्ष से लेकर सेलिब्रिटीज़, राजनेता और आम आदमी हर किसी के जहन में यही सवाल है कि आखिर आजादी के इतने बरसों बाद भी महिलाएं सुरक्षित और आजाद क्यों नहीं हैं। कोलकाता के रेप-मर्डर मामले की जांच अब सीबीाआई के हाथों में है। आपराधिक अकाड़ो पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि देश में बलात्कार चौथे सबसे आम अपराध है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2019 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 32,033 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे या ये भी कहा जा सकता है कि हर रोज औसतन 88 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा नाबालिगों के साथ उत्पीड़न और बलात्कार की घटनाएं भी सामने आतीं रहतीं हैं। ब्यूरो की इन आंकड़ों से जाहिर है बलात्कार की घटनाएं कम नहीं हुईं हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों में भी बलात्कार की घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक हैं।खैर, कोलकाता की घटना के बाद एक फिर डाॅक्टर आंदोलित हैं और हड़ताल पर चले गए हैं। इन डाॅक्टरों को देश के अन्य राज्यों के डाॅक्टरों का भी समर्थन मिल रहा है। कोलकाता में डाॅक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रहीं हैं। डाॅक्टरों का कहना है कि उन्हें माकूल सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए। सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। मृतक डॉक्टर के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और इस मामले में जल्द से जल्द न्याय हो। हड़ताली डॉक्टरों की एक प्रमुख मांग यह है कि हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए देश में एक नया केंद्रीय कानून या सेंट्रल हेल्थकेयर प्रोटेक्शन एक्ट बनाया जाए। साथ ही इस घटना की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सख्त कदम उठाए जाने की बात कही है। देश भर के डॉक्टर कोलकाता के डॉक्टरों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं। डाॅक्टरों की चिंता बेवजह नहीं है। हालांकि, जहां तक केंद्रीय कानून की मांग है तो पहले ये देखना होगा कि क्या बलात्कार की इस तरह की घटनाओं के पीछे कानून का कमजोर होना है या फिर किसी कड़े कानून की कमी इसकी वजह है। वैसे, ज्यादातर राज्यों में मेडिकेयर सर्विस पर्संस एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टिट्यूशंस (प्रिवेंशन ऑफ वॉयलेंस एंड डैमेज-लॉस टु प्रॉपर्टी) एक्ट पहले से ही लागू है। मगर इन राज्यों में भी इसके तहत दर्ज मामलों में दस फीसदी ही आरोप तय होने के बाद अदालत पहुंच सके। तो ये माना जा सकता है कि असल समस्या कानून की कमी नहीं बल्कि उस पर सख्ती से अमल है। बहरहाल, अस्पताल में लेडी डाॅक्टर ही नहीं बल्कि पुरूष डाॅक्टर, नर्सिंग स्टाॅफ और दिगर स्वास्थ्य कर्मी भी हमलों का शिकार होते रहते हैं। बात सिर्फ यहीं तक नहीं हैं अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा भी बड़ा मसला है। अस्पतालों में भर्ती महिला मरीजों भी यौन हमलों की खबरें आतीं रहतीं हैं। देश में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को लेकर व्यापक जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है। मंहगी शिक्षा और मंहगी दवाएं तथा अस्पतालों में इलाज और जांच के नाम पर होने वाला खर्च भी चर्चा का विषय है। कतिपय अस्पतालों में मेडिसिन और सर्जिकल आइटम की सप्लाई के गोरखधंधे, कमीशनखोरी, और इससे जुड़े रैकेट के सक्रिय होने की बात तो सब जानते हैं लेकिन कोलकाता के इस मामले में सेक्स रैकेट और ड्रग्स का एंगल भी सामने आया है। बहरहाल, सीबीआई जांच के बाद और भी चैकाने वाले खुलासे हो सकते हैं लेकिन इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। डाॅक्टरों पर हमलों के साथ ही मरीजों पर भी वित्तीय हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाया जाना जरूरी है। https://newsnationalworld.news.blog/2024/08/16/after-the-incident-with-the-doctor-in-calcutta-junior-and-senior-doctors-of-indore-took-out-a-candle-march/ Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मनरेगा के खिलाफ सत्ताधारी वर्ग के नीतिगत हमले दुष्कर्म के आरोपी को बड़नगर पुलिस ने किया गिरफ्तार