सेमरिया एवं मऊगंज विधायक ने मांगी थी जानकारी वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के जबाब पर खड़े हो रहे सवाल सीधी।विशेष संवाददाता -प्रवीण कुमार पाण्डेय -9303816202फर्जी तरीके से आबकारी ठेेकेदारों को करोड़ों रूपये की बैंक गारंटी देने के मामले में नया मोड़ आया है, रीवा जिले के सेमरिया विधायक अभय मिश्रा एवं मऊगंज जिले के मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल द्वारा इस संबंध में विधानसभा में प्रश्न पूछे थे।विधायकों द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा दिया गया जवाब कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। मंत्री के जवाब से जो दो सवाल खड़े होते हैं वो ये कि- क्या इस पूरे मामले को लेकर विधानसभा को भेजे गए जवाब में विभाग द्वारा विधानसभा को ही गुमराह करने की कोशिश की गई या फिर मंत्री द्वारा दिया गया जवाब तथ्यों से मैच नहीं खाता।इस पूरे मामले का खुलासा रीवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बीके माला द्वारा किया गया था, जिसका खुलासा होने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित सीधी के सीईओ ने मोरवा शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया था।विधानसभा में पूछें गए सवाल पर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा दिए गए जवाब पर आपत्ति जताते हुए श्री माला ने कहा कि सिंगरौली जिले के जिला सहकारी बैंक मोरवा शाखा से रीवा जिले के शराब ठेकेदारों से सांठगांठ कर फर्जी बैंक गारंटी तैयार की गई थी जिस पर विधानसभा में इस मामले को दो विधायकों द्वारा उठाया गया। इस मामले को लेकर उप मुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री द्वारा दिए गए जवाब में स्पष्ट रूप से ये उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। इससे ये साफ हो रहा है कि इस मामले को छिपाने के लिए आबकारी विभाग रीवा द्वारा गलत जानकारी विधानसभा को भेजी गई है।ये था मऊगंज विधायक का सवालविधानसभा के प्रश्न क्रमांक 299 में मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने यह जानकारी विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा गया था कि रीवा संभाग में फर्जी बैंक गारंटी (एफडीआर) लगाकर शराब लाइसेंस लेने के प्रकरण में कब-कब किस-किस स्थान के कितनी कितनी राशि के पकड़ में आए, शासन द्वारा प्रश्न तिथि तक क्या क्या कार्यवाही हुई, किस-किस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई ? अगर नहीं करवाई गई तो क्यों का जवाब चाहा गया था, इसी संबंध में रीवा जिले के सेमरिया विधायक अभय मिश्रा द्वारा भी जवाब मांगा गया था।उच्च न्यायालय में दायर है याचिकाबता दें कि इस मामले को लेकर पूर्व में बीके माला एडवोकेट सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर एक उच्च स्तरीय जहां टीम गठित हुई थी जिस जांच टीम ने प्रकरण की गंभीरता से जांच की और जांच प्रतिवेदन में सहित सक्षम अधिकारियों को भेजा गया था, प्रकरण पर व्यापक पैमाने पर फर्जी बड़ा हुआ है जिसमें फर्जी बैंक गारंटी के मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर हाईकोर्ट में प्रकरण जनहित याचिका दायर की गई थी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में बीके माला एडवोकेट के द्वारा इस संबंध में प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में है जबलपुर में सभी को नोटिस जारी कर दी गई है और एक महीने जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ कार्यालय रीवा में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। इन समूहों के नाम बनी थी फर्जी बैंक गारंटीजिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित सीधी के सिंगरौली जिले की मोरवा शाखा प्रबंधक नागेन्द्र सिंह द्वारा शराब दुकान के समूहों को फर्जी बैंक गारंटी दी गई थी, उसमें 9 समूह शामिल है। जानकारी अनुसार बैकुण्ठपुर को 1 करोड़ 45 लाख 55 हजार, लौर समूह को 1 करोड़ 6 लाख 97 हजार,नईगढ़ी समूह के नाम 9 लाख 3 हजार तथा हनुमना समूह के लिए 1 करोड़ 27 लाख 77 हजार रूपये की बैैंक गारंटी तैयार की गई है। इसी तरह इटौरा समूह को 1 करोड़ 56 लाख 37 हजार,रायपुर कर्चुलियान समूह को 78 लाख 10 हजार तथा समान नाका समूह रीवा को 2 करोड़ 45 लाख एवं रेल्वे स्टेशन समूह सतना को 2 करोड़ 23 लाख की बैंक गारंटी जिला सहकारी बैंक सीधी के मोरवा शाखा द्वारा दी गई है। बैंक गारंटी जारी करने के एवज में बैंक के पास रखी गई सम्पत्ति का व्यौरा नहीं पाया गया था। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन फोन चोरी होने के बाद ऐसे ब्लॉक करें अपनी यूपीआई आईडी, नहीं होगा नुकसान… भगवान जगन्नाथ का रथ यात्रा महोत्सव आज