भारतीय न्याय संहिता बिल क्या है….?
नए क़ानूनों में क्या क्या बदलेगा..?

भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023 बिल
नए विधेयक में सामुदायिक सेवा को सजा के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अंतर्गत पहले की 511 धाराओं की बजाय अब 358 धाराएं होंगी। जिसमें 21 नए अपराध जोड़े गए हैं और 41 अपराधों में सजा के टाइम को बढ़ाया गया है।

संसद के दोनों सदनों में टेलीकॉम बिल 2023 पारित हो गया है. इस विधेयक में फर्जी सिम लेने पर 3 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह कानून बन जाएगा.


बदल दिए जाएंगे ब्रिटिश काल के कानून, जानिए क्या हैं नए तीन क्रिमिनल लॉ बिल
लोकसभा में 20 दिसंबर 2023 को तीन संशोधित आपराधिक कानून विधेयक पारित किए गए। भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023 हैं। भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023 भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 का स्थान लेगी,जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023 आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 (CrPC) की जगह लेगी। भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023 भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 का स्थान लेगी।
लोकसभा ने 20 दिसंबर 2023 को तीन संशोधित आपराधिक कानून विधेयक पारित किए। जो भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023 हैं।

आइए अब इन्हें आसान भाषा में तीनों क्रिमिनल बिल के विषय में जानते हैं।
भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023
भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 का स्थान लेगी। यह देश में क्रिमिनल ऑफेंस पर प्रमुख लॉ है। नए विधेयक में सामुदायिक सेवा को सजा के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अंतर्गत पहले की 511 धाराओं के बजाय अब 358 धाराएं होंगी। इसमें 21 नए अपराध जोड़े गए हैं और 41 अपराधों में सजा के टाइम को बढ़ा दिया गया है।



भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023, आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 (CrPC) की जगह लेगी। CrPC अरेस्ट, प्रॉसीक्यूशन और बेल के लिए है। इसके अंतर्गत CrPC में 531 धाराएं होंगी, जबकि पहले केवल 484 धाराएं थीं। नए विधेयक में 177 धाराओं में बदलाव किया गया हैं और 9 नई धाराएं जोड़ी गई और 14 धाराओं को निरस्त कर दिया गया।

भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023
यह विधेयक भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 का स्थान लेगी। यह अधिनियम इंडियन कोर्ट्स में एविडेंस की ऐडमिसिबिलिटी पर आधारित है। यह सभी नागरिक और आपराधिक कार्यों पर लागू होता है। इन कानूनों में FIR से लेकर केस डायरी, आरोप पत्र, और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के प्रावधान में किया गया है। इसके अंतर्गत पहले की 167 धाराओं के बजाय अब 170 धाराएं होंगी। 24 धाराओं में बदलाव किया गया।


नए बिल में बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है
लोकसभा में वॉईस वोट से विधेयकों को पारित किया गया। इसका उद्देश्य ब्रिटिश काल के कानूनों को बदलना, नया कानून मौजूदा आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा । वर्तमान कानूनों में केवल दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान हैं, लेकिन नए कानून मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमे महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता दी गई है।

इस प्रस्तावित कानूनों ने राजद्रोह को अपराध के रूप में खत्म कर दिया गया है और “राज्य के खिलाफ अपराध” नामक एक नई धारा पेश की गई है । जिसमें पहली बार, आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। मॉब लिंचिंग के लिए भी मौत की सजा दी गई है। नाबालिग से दुष्कर्म में फांसी की सजा का प्रावधान है। ट्रायल अदालतों को FIR दर्ज होने के तीन साल में हर हाल में सजा सुनानी होगी। अपराध कर विदेश भाग जाने वाले या कोर्ट में पेश न होने वालों के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में भी सुनवाई होती रहेंगी, और सजा भी सुनाई जा सकेगी।

अब गिरफ़्तारी पर देनी होगी परिवार को सूचना

3 साल से कम सज़ा वाले अपराध पर : 3 दिन में FIR

3 साल से ज़्यादा सज़ा वाले अपराध में : 14 दिन में FIR

नाबालिग से रेप कराने पर होगी फसी

गंभीर अपराध जैसे गैंगरेप में 20 साल या ज़िन्दा रहने तक सज़ा

मॉब लिंचिंग पर फ़ांसी की सज़ा

सड़क हादसे के बाद ज़ख्मी को अस्पताल पहुंचाया, तो होगी कम सज़ा

अब आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी चलेगा ट्रायल

वहीं 30 दिन में आरोपी कबूलनामा देता है, तो कम सज़ा

पुलिस को 3 महीने में बताना होगा, क्या एक्शन लिया और क्या किया।

भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा मिली जानकारी के अनुसा… केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोक सभा में भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक, 2023 पर चर्चा का जवाब दिया, चर्चा के बाद सदन में तीनों विधेयकों को पारित कर दिया गया।


आपराधिक न्याय प्रणाली को चलाने वाले लगभग 150 वर्ष पुराने तीनों कानूनों में पहली बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीयता, भारतीय संविधान और भारत की जनता की चिंता करने वाले परिवर्तन किए गए हैं।

दंड देने का उद्देश्य पीड़ित को न्याय देना और समाज में उदाहरण स्थापित करना होना चाहिए।

भारतीय आत्मा के साथ बनाए गए इन तीन कानूनों से हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा।

मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है, नए कानूनों में भी ऐसी व्यवस्था की गयी है, जिससे कोई भी आतंकवादी बच नहीं पायेगा।

मानव हत्या और महिला सुरक्षा की दिशा में न्याय नहीं, बल्कि अंग्रेजों के खजाने और ब्रिटिश ताज की रक्षा ही पुराने कानून की प्राथमिकता थी।

नए कानूनों में सबसे पहले महिलाओं और बच्चों के विरूद्ध अपराधों, मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले विषयों, देश की सीमाओं की सुरक्षा। करेंसी नोट और सरकारी स्टांप के साथ छेड़खानी आदि को रखा गया है।

मोदी ने एक ऐतिहासिक निर्णय करते हुए राजद्रोह की धारा को पूरी तरह से हटाने का काम किया है और राजद्रोह की जगह देशद्रोह को रखा गया है।

मोदी सरकार द्वारा लाए गये इन कानूनों के लागू होने के बाद पूरे देश में एक प्रकार की न्याय प्रणाली होगी।

अमित शाह,,, चाहे राम मंदिर हो, धारा 370 हो, तीन तलाक हो या महिला आरक्षण हम जो कहते हैं, वह करते हैं
देश की सुरक्षा सबसे ऊपर है, सरकार के खिलाफ कोई कुछ भी कहे, मगर कोई देश के झंडे, सुरक्षा व संपत्ति से साथ खिलवाड़ करेगा, तो वह जेल जायेगा।
अब चार्जशीट को 180 दिन में दाखिल करना होगा और 14 दिन में मजिस्ट्रेट को इसका संज्ञान लेना होगा।

नए कानूनों में हमने पुलिस की जवाबदेही तय करते हुए पीड़ित केंद्रित कानून बनाने का काम किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि दया का अधिकार उसी का बनता है जो अपने कृत्य पर पछतावा करता है।

न्याय प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अब जिला एवं राज्य स्तर पर डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन बनाए जाएंगे।

टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से हमने भारत की न्यायिक व्यवस्था को दुनिया में सबसे अत्याधुनिक बनाने का काम किया है।

ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत अब अपराधियों को सज़ा भी होगी और उनकी संपत्ति भी कुर्क होगी, एक तिहाई कारावास काट चुके अंडर ट्रायल कैदी के लिए जमानत का प्रोविजन किया गया है।

जांच में फॉरेंसिक साइंस के आधार पर हमने प्रॉसीक्यूशन को बल देने का काम किया गया है और बलात्कार की पीड़ित महिला का ऑडियो-वीडियो माध्यम से बयान लेना अनिवार्य किया है।


सदन की चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली को चलाने वाले लगभग 150 वर्ष पुराने तीनों कानूनों में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीयता, भारतीय संविधान औऱ भारत की जनता की चिंता करने वाले परिवर्तन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 1860 में बने भारतीय दंड संहिता का उद्देश्य न्याय देना नहीं बल्कि दंड देना था। उन्होंने कहा कि अब उसकी जगह भारतीय़ न्याय संहिता, 2023, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और इंडियन एवीडेंस एक्ट, 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 इस सदन की मान्यता के बाद पूरे देश में अमल में आएंगे। उन्होंने कहा किभारतीय आत्मा के साथ बनाए गए इन तीन कानूनों से हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 35 सांसदों ने इन विधेयकों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुलामी की मानसिकता और निशानियों को जल्द से जल्द मिटाने और नए आत्मविश्वास के साथ महान भारत की रचना का रास्ता प्रशस्त करने का आग्रह रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्रचारी से कहा था कि कोलोनियल कानूनों से इस देश को जल्दी मुक्ति मिलनी चाहिए औऱ उसी के तहत गृह मंत्रालय ने 2019 से इन तीनों पुराने कानूनों में परिवर्तन लाने के लिए गहन विचार-विमर्श शुरू किया था। श्री शाह ने कहा कि ये कानून एक विदेशी शासक ने अपने शासन को चलाने और गुलाम प्रजा को गवर्न करने के लिए बनाए गए थो। उन्होंने कहा कि इन तीनों पुराने कानूनों के स्थान पर लाए जा रहे ये नए कानून हमारे संविधान की तीन मूल भावनाओं- व्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार और सबके साथ समान व्यवहार के सिद्धांतों के आधार पर बनाए गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान तीनों कानूनों में न्याय की कल्पना ही नहीं की गई है और दंड देने को ही न्याय माना गया है। उन्होंने कहा कि दंड देने का उद्देश्य पीड़ित को न्याय देना और समाज में ऐसा उदाहरण स्थापित करना है ताकि कोई इस प्रकार की गलती नकरे। श्री शाह ने कहा कि इन तीनों कानूनों का आज़ादी के इतने वर्षों बाद पहली बार मानवीकरण हो रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल ने इन तीनों कानूनों को गुलामी की मानसिकता और चिन्हों से मुक्त कराया है। उन्होंने कहा कि पुराने कानून इस देश के नागरिकों के लिए नहीं बल्कि अंग्रेज़ों के राज की सुरक्षा के लिए बने थे। पुराने कानूनों में मानव वध और महिला के साथ दुर्व्यवहार को प्राथमिकता न देकर खज़ाने की रक्षा, रेलवे की रक्षा और ब्रिटिश ताज की सलामती को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में सबसे पहले महिलाओं और बच्चों के विरूद्ध अपराधों, मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले विषयों, देश की सीमाओं की सुरक्षा, सेना, नौसेना और वायुसेना से संबंधित अपराध, इलेक्टोरल अपराध, सिक्के, करेंसी नोट और सरकारी स्टांप के साथ छेड़खानी आदि को रखा गया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में पहली बार हमारे संविधान की स्पिरिट के हिसाब से कानून बनने जा रहे हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने इन कानूनों में पहली बार आतंकवाद की व्याख्या कर इसके सभी लूपहोल्स खत्म कर दिए हैं। उन्होंने कहा इन कानूनों में राजद्रोह को देशद्रोह में बदलने का काम किया गया है, और साथ ही ऐसी दृढ़ता भी रखी गई है कि देश को नुकसान पहुंचाने वाले को कभी नहीं बख्शा जाएगा। श्री शाह ने कहा कि आने वाले 100 साल में होने वाले संभावित टेक्निकल इनोवेशन की कल्पना कर हमारी न्यायिक पद्धति को सुसज्ज करने के लिए सभी प्रोविज़न इन कानूनों में किए गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि मॉब लिंचिंग एक घृणित अपराध है और इन कानूनों में उसके लिए मत्यु दंड का प्रावधान किया गया है। इनमें पुलिस औऱ नागरिक के अधिकारों के बीच अच्छी तरह से संतुलन रखा गया है। सज़ा की दर बढ़ाने और साइबर क्राइम के लिए इन कानूनों में प्रोविज़न किए हैं। जेलों पर बोझ कम करने के लिए कम्युनिटी सर्विस को भी पहली बार इनमें सज़ा के रूप में शामिल कर इसे कानूनी जामा पहनाया जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि इन कानूनों के संबंध में कुल 3200 सुझाव प्राप्त हुए थे और इन तीनों कानूनों पर विचार के लिए उन्होंने स्वयं 158 बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त, 2023 को इन तीनों नए विधेयकों को गृह मंत्रालय की स्थायी समिति के विचारार्थ भेजा गया था। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीनों नए कानून न्याय, समानता और निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों के आधार पर लाए गए हैं। श्री शाह ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस को इनमें बहुत तवज्जो दी गई है। इन कानूनों के माध्यम से जल्द न्याय मिले, इसके लिए इन कानूनों में पुलिस, वकील और न्यायाधीश के लिए समय सीमा रखने का काम भी किया गया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 484 धाराओं वाले CrPC को रिप्लेस करने वाली भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में अब 531 धाराएं रहेंगी, 177 धाराओं को बदल दिया गया है, 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं और 14 धाराओं को निरस्त किया गया है। भारतीय न्याय संहिता, जो IPC को रिप्लेस करेगी। पहले की 511 धाराओं के स्थान पर अब 358 धाराएं होंगी, 20 नए अपराध जोड़े गए हैं, 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सज़ा रखी गई है, 6 अपराधों में सामुदायिक सेवा का दंड रखा गया है और 19 धाराओं को निरस्त किया गया है। इसी प्रकार, भारतीय साक्ष्य विधेयक, जो Evidence Act को रिप्लेस करेगा, 167 के स्थान पर अब 170 धाराएं होंगी, 24 धाराओं में बदलाव किया गया है, 2 नई धाराएं जोड़ी गई है और 6 धाराएं निरस्त की गई हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि ये नरेन्द्र मोदी सरकार है, जो कहती है वो करती है। हमने कहा था कि धारा 370 और 35ए को हटा देंगे, हटा दिया, आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएंगे औऱ सुरक्षाबलों को फ्री हैंड देंगे, हमने किया। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के कारण जम्मू औऱ कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्रों और नॉर्थईस्ट में हिंसक घटनाओं में 63 प्रतिशत और मृत्यु में 73 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के 70 प्रतिशत से ज़्यादा क्षेत्र से AFSPA को हटा लिया गया है क्योंकि वहां कानून और व्यवस्था की स्थिति ठीक हुई है। हमने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर बनाएंगे और 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर में राम लला विराजमान होंगे। हमने कहा था कि संसद औऱ विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देंगे, हमने सर्वानुमति से देकर देश की मातृशक्ति को सम्मानित करने का काम किया। हमने कहा था कि तीन तलाक मुस्लिम माताओं-बहनों के लिए अन्याय वाला है, उसे समाप्त कर देंगे, हमने वो वादा भी पूरा किया। हमने कहा था कि न्याय मिलने की गति को बढ़ाएंगे और न्याय दंड के आधार पर नहीं होगा, मोदी जी ने आज ये भी कर दिखाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि न्याय एक अंब्रेला टर्म है और ये एक सभ्य समाज की नींव डालता है। उन्होंने कहा कि आज इन तीनों नए विधेयकों से जनता की न्याय की अपेक्षा को पूरा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका मिलकर इस देश में भारतीय विचार की न्याय प्रणाली को प्रस्थापित करेंगे। श्री शाह ने कहा कि पहले दंड देने की सेन्ट्रलाइज़्ड सोच वाले कानून थे, अब विक्टिम-सेन्ट्रिक जस्टिस की शुरूआत होने जा रही है। ईज़ ऑफ जस्टिस को सरल, सुसंगत, पारदर्शी और जवाबदेह प्रोसीजर के माध्यम से साकार किया गया है और एनफोर्समेंट के लिए निष्पक्ष, समयबद्ध, एवीडेंस-बेस्ड स्पीडी ट्रायल रखा गया है जिससे अदालतों और जेलों पर बोझ कम होगा। श्री शाह ने कहा कि जांच में फॉरेंसिक साइंस के आधार पर हमने प्रॉसीक्यूशन को बल देने का काम किया गया है और बलात्कार की पीड़ित महिला का ऑडियो-वीडियो माध्यम से बयान लेना अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि ये नए कानून पारित होने के बाद कश्मीर से कन्याकुमारी औऱ द्वारका से असम तक पूरे देश में एक ही न्याय प्रणाली होगी। इसमें डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन का एक्सटेंशन और महत्व और उसे अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि अब एक स्वतंत्र डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन हर ज़िले में बनेगा, राज्यस्तर पर बनेगा जो पारदर्शिता के साथ केस में अपील का निर्णय करेगा। कई मामलों में पुलिस की जवाबदेही तय की गई है और गिरफ्तार व्यक्ति की सूचना अनिवार्य रूप से हर पुलिस स्टेशन में रखनी होगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में मानव और शरीर संबंधित अपराझओं जैसे, बलात्कार, गैंगरेप, बच्चों के खिलाफ अपराध, हत्या, अपहरण और ट्रैफिकिंग आदि को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी ने एक ऐतिहासिक निर्णय करते हुए राजद्रोह की धारा को पूरी तरह से हटाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने राजद्रोह की जगह देशद्रोह को रखा है। उन्होंने कहा कि इस देश के खिलाफ कोई नहीं बोल सकता और इसके हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। श्री शाह ने कहा कि भारत के ध्वज, सीमाओं औऱ संसाधनों के साथ अगर कोई खिलवाड़ करेगा तो उसे निश्चित रूप से जेल जाना होगा क्योंकि नरेन्द्र मोदी सरकार का थ्रस्ट है कि देश की सुरक्षा सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि हमने देशद्रोह की परिभाषा में उद्देश्य और आशय की बात की है और अगर उद्देश्य देशद्रोह का है, तो आरोपी को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस नई पहल को अपना रंग देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार संविधान की स्पिरिट के हिसाब से चलने वाली सरकार है और अगर देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा तो उसे सज़ा ज़रूर होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेज़ों को देश से निकालने के लिए राजद्रोह के आरोप में अपने जीवन का स्वर्णकाल जेल में काटा, आज नरेन्द्र मोदी सरकार की इस पहल से उनकी आत्मा को ज़रूर संतुष्टि मिलेगी कि आज़ाद भारत में आज इस अन्यायिक प्रोविज़न को समाप्त कर दिया गया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी इन कानूनों में कई प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में इस बारे में एक नया चैप्टर जोड़ा गया है। 18 वर्ष से कम उम्र की महिला के बलात्कार के अपराध में आजीवन कारावास औऱ मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि गैंगरेप के मामलों में 20 साल या ज़िंदा रहने तक की सज़ा का प्रावधान किया गया है। श्री शाह ने कहा कि आज़ादी के 75 सालों के बाद पहली बार आतंकवाद को आपराधिक न्याय प्रणाली में जगह देने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी ही मानवाधिकार का हनन करता है और उसे कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डायनामाइट, विस्फोटक पदार्थ, ज़हरीली गैस, न्यूक्लीयर का उपयोग जैसी घटनाओं में कोई भी मृत्यु होती है, तो इसका ज़िम्मेदार आतंकवादी कृत्य में लिप्त माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परिभाषा से इस कानून के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है, लेकिन जो आतंकवादी कृत्य करते हैं उन्हें कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए और इस सदन द्वारा इस धारा के अनुमोदन से आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस का एक संदेश जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इन कानूनों में संगठित अपराध की भी पहली बार व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि गैरइरादतन हत्या के मामले में पुलिस के पास जाने और पीड़ित को अस्पताल ले जाने के मामले में कम सज़ा का प्रावधान किया है। श्री शाह ने कहा कि हिट एंड रन केस में हमने 10 साल की सज़ा का प्रावधान किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि अब पुलिस को शिकायत के 3 दिनों में ही FIR दर्ज करनी होगी और 3 से 7 साल की सज़ा वाले मामले में प्रारंभिक जांच करके एफआईआर दर्ज करनी होगी। उन्होंने कहा कि अब हमने बिना किसी देर के बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जांच रिपोर्ट को 7 दिनों के अंदर पुलिस थाने और न्यायालय में सीधे भेजने का प्रावधान किया है। अब चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा तय कर इसे 90 दिन रखा गया है और इसके बाद और 90 दिन ही आगे जांच हो सकेगी। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट को 14 दिनों में मामले का संज्ञान लेना ही होगा औऱ कार्रवाई शुरू हो जाएगी। श्री शाह ने कहा कि आरोपी द्वारा आरोपमुक्त होने का निवेदन भी 60 दिनों में ही करना होगा। उन्होंने कहा कि कई मामले ऐसे हैं जिनमें 90 दिनों में आरोपी की अनुपस्थिति में भी ट्रायल कर उन्हें सज़ा सुनाई जा सकेगी। अब मुकदमा खत्म होने के 45 दिनों में ही न्यायाधीश को निर्णय देना होगा। इसके साथ ही निर्णय औऱ सज़ा के बीच 7 ही दिनों का समय मिलेगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा अपील खारिज करने के 30 दिनों के अंदर ही दया याचिका दाखिल की जा सकती है।

श्री अमित शाह ने कहा कि e-FIR से कोई भी महिला थाने में एफआईआर करा सकती है, उसका संज्ञान भी लिया जाएगा और दो दिन के अंदर ही घर आकर इसका जवाब लेने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि हमने टेक्नोलॉजी का उपयोग भी पुलिस के अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि क्राइम सीन, इन्वेस्टिगेशन और ट्रायल के तीनों चरण में हमने टेक्नोलॉजी के उपयोग को तवज्जो दी है, जिससे पुलिस जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही तो निश्चित रूप से सुनिश्चित होगी ही, सबूत की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और विक्टिम और आरोपी दोनों के अधिकारों की रक्षा होगी। एविडेंस, तलाशी और जब्ती में वीडियो रिकॉर्डिंग का कंपलसरी प्रोविजन किया गया है, जिससे किसी को फ्रेम करने की संभावनाओं में बहुत कमी आएगी। श्री शाह ने कहा कि बलात्कार के मामले में पीड़िता का बयान कंपलसरी करने का निर्णय नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे यहां दोषसिद्धि की दर बहुत कम है और इसे बढ़ाने के लिए साइंटिफिक एविडेंस पर थ्रस्ट देना पड़ेगा। इस बिल में क्वालिटी ऑफ इन्वेस्टिगेशन में सुधार करने, इन्वेस्टिगेशन साइंटिफिक पद्धति से करने और 90% का कन्विक्शन रेट का लक्ष्य रखते हुए हमने प्रावधान किया है कि 7 साल से ज्यादा सजा वाले अपराधों में FSL टीम का विज़िट कंपलसरी होगी। श्री नरेन्द्र मोदी जी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने गुजरात फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनाई, जब प्रधानमंत्री बने तो नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनाई और नेशनल फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी के तहत अब तक 9 राज्यों में एनएफएसयू के 7 परिसर और दो ट्रेनिंग अकादमी खुल चुके हैं। 5 साल बाद हर साल 35000 फॉरेंसिक एक्सपर्ट हमें मिलेंगे जो हमारी ज़रूरत को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार 6 अत्याधुनिक सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री बना रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब पीड़ित किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर ज़ीरो एफआईआर करा सकता है और वो 24 घंटे में संबंधित पुलिस स्टेशन में अनिवार्य रूप से ट्रांसफर करनी होगी। इसके साथ ही हर जिले और थाने में पुलिस अधिकारी को पदनामित किया है जो गिरफ्तार लोगों की सूची बनाकर उनके संबंधियों को इन्फॉर्म करेगा। श्री शाह ने कहा कि जमानत और बांड को स्पष्ट नहीं किया गया था, लेकिन अब जमानत और बांड को स्पष्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि घोषित अपराधियों की संपत्ति की कुर्की के लिए भी प्रावधान किया गया है। पहले 19 अपराधों में ही भगोड़ा घोषित कर सकते थे, अब 120 अपराधों में भगोड़ा घोषित करने का प्रावधान किया गया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत अब अपराधियों को सज़ा भी होगी और उनकी संपत्ति भी कुर्क होगी। एक तिहाई कारावास काट चुके अंडर ट्रायल कैदी के लिए जमानत का प्रोविजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सजा माफी को भी तर्कसंगत बनाने का काम किया गया है। अगर मृत्यु की सजा है तो ज्यादा से ज्यादा आजीवन कारावास हो सकता है, इससे कम नहीं हो सकेगी। आजीवन कारावास है तो 7 साल की अवधि सज़ा भोगनी ही पड़ेगी और 7 वर्ष या उससे अधिक सजा है तो कम से कम 3 साल जेल में रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टेशनों में बड़ी संख्या में पड़ी हुई संपत्ति की वीडियोग्राफी फोटोग्राफी मजिस्ट्रेट को करवाकर अदालत की सहमति से 30 दिनों के अंदर इसे बेच दिया जाएगा और पैसे कोर्ट में जमा होंगे। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम में कई बदलाव किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को दस्तावेज की परिभाषा में शामिल कर दिया है और अब किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को दस्तावेज माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त बयान को साक्ष्य की परिभाषा में शामिल कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब इसका पूर्ण अमल देश के हर थाने में हो जाएगा तब हमारी न्यायिक प्रक्रिया दुनिया में सबसे आधुनिक न्याय प्रक्रिया हो जाएगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब तक ICJS के माध्यम से देश के 97% पुलिस स्टेशन को कम्‍प्‍यूराइज्‍ड करने का काम समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अदालतों का भी आधुनिकीकरण हो रहा है और आईसीजेएस के माध्यम से फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, थाना, गृह विभाग, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऑफिस, जेल और कोर्ट एक ही सॉफ्टवेयर के तहत ऑनलाइन होने की कगार पर हैं। इसके साथ ही स्मार्टफोन, लैपटॉप, मैसेज वेबसाइट और लोकेशनल साक्ष्य को सुबूत की परिभाषा में शामिल किया गया है और आरोपियों, विशेषज्ञों पीड़ितों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कोर्ट के सामने उपस्थित होने की अनुमति दी है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि एक आतंकवादी कृत्य के लिए एक ही जगह गुनाह रजिस्टर होगा, लेकिन CrPC में आज तक आतंकवाद की व्याख्या नहीं की गई थी और बचकर निकल जाते थे, उनके बचने के सारे रास्ते इस कानून के माध्यम से हमने बंद कर दिए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि दया का अधिकार उसी का बनता है जो अपने कृत्य पर पछतावा करता है। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस को इतनी दृढ़ता के साथ कानून में जगह देने वाला एकमात्र देश भारत होगा। श्री शाह ने कहा कि ब्रिटिश काल के सारे गुलामी के चिन्‍हों को समाप्त कर अब ये संपूर्ण भारतीय कानून बनने जा रहा है।

*********************************************………….………………………………………………………………….._________________________________________________

NEWS NATIONAL WORLD's avatar

By NEWS NATIONAL WORLD

NNW NEWS NATIONAL WORLD MP/CG NEWS, समाचार, क्राइम, जन समस्या, पॉलिटिक्स, बॉलीवुड, सामाजिक,इत्यादि। मीडिया समूह का ऑनलाइन हिंदी समाचार पोर्टल है, जो की राजनीति, खेल, मनोरंजन, व्यवसाय, जीवन शैली, कला संस्कृति, पर्यटन से जुड़ी खबरों को हिंदी भाषा में एक ही स्थान पर लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज के साथ प्रदान करता है। अंकुल प्रताप सिंह,बघेल +91 8516870370 सब एडिटर गौरव जैन इंदौर +91 98276 74717 सह संपादक आमिर खान इंदौर +91 9009911100, प्रदीप चौधरी, संभाग ब्यूरो चीफ इंदौर +919522447447, रीवा जिला ब्यूरो चीफ कुशमेन्द्र सिंह +91 94247 01399.

Leave a Reply

You missed

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading