(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)इस बार टमाटर ने भी अपने नखरे दिखा ही दिए। अब तक अक्सर कभी आलू, तो कभी प्याज के नखरे ही सरकारों को सिरदर्द देते रहे थे। सुना है कि कोई जमाना तो ऐसा भी था, जब आलू-प्याज के नखरों के चलते, सरकारें तक बदल जाया करती थीं। लेकिन, टमाटर ने कभी ऐसा तगड़ा नखरा दिखाया हो, हमें तो याद नहीं पड़ता। वैसे भी अरबपतियों की मीडिया के साथ सैटिंग के बल पर, मोदी जी ने सरकार के लिए तो गेंडे की इतनी मोटी खाल का इंतजाम कर दिया है कि सांप्रदायिकता के किसी भूकंप, बेरोजगारी की किसी सुनामी का, उनकी बड़ी सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है, फिर महंगाई-वंहगाई की तेज से तेज आंधी तो उसका उखाड़ ही क्या लेगी।फिर भी एक बात में अभी थोड़ा कन्फ्यूजन है। आखिर, टमाटर के इतने भाव दिखाने के लिए दोषी कौन है? सच पूछिए, तो अब तक तो हम तो यही समझ रहे थे कि मोदी जी के राज में देश में जो टू मच डैमोक्रेसी चल रही है, उसी की वजह से टमाटर का मिजाज इतना बिगड़ गया है। जब टमाटर ने ज्यादा भाव दिखाने शुरू किए, तो मोदी जी ने इसका भी जरा-सा बुरा नहीं माना। उल्टे उन्होंने यह सोचकर उसे बढ़ावा ही दिया कि जब हर तरह के तेल से लेकर प्याज-ब्याज तक बाकी सभी चीजों के भाव आसमान पर चढ़ने का उनकी प्रजा ने खास बुरा नहीं माना, तो बेचारे टमाटर के साथ ही दुभांत क्यों होने देंगे? बाकी सब की तरह टमाटर को भी भाव दिखाने का पूरा मौका मिलना चाहिए।लेकिन, अब असम के डबल इंजन वाले सीएम, हिमांत बिश्वाशर्मा कह रहे हैं कि टमाटर वगैरह के भाव, मियां भाइयों की वजह से बढ़े हैं। सुना है कि उन्होंने तो इसकी भी धमकी दी है कि मियां भाई या तो टमाटर को होश में लाएं या फिर सब्जी मंडियों वगैरह से अपना बोरिया-बिस्तरा बंधवाए जाने के लिए तैयार हो जाएं! वैसे कुछ भगवाइयों ने इसमें भी मोदी जी के विरोध का एंगल खोज लिया है। कह रहे हैं कि यह कैसे मुमकिन है कि छप्पन इंच की छाती के राज के रहते, ये मियां भाई इतने सिर कैसे चढ़ गए हैं कि टमाटर दो सौ रुपए को पार कर गया है? क्या ऐसा सोचना-कहना, मोदी के हिंदू हृदय सम्राटत्व पर कलंक लगाने की कोशिश करना ही नहीं है?इससे अच्छा तो यही रहेगा कि टमाटर के ज्यादा भाव दिखाने को भी, मणिपुर के मामले में बाहरवालों के नाक घुसाने की तरह, अंतर्राष्ट्रीय साजिश मानने पर ही कायम रहा जाए। टमाटर का मामला तो वैसे भी बाहरी घुसपैठ का है। पहले तो इस विदेशी फल ने सब्जी होने की झूठी विनम्रता ओढक़र, हमारे देश में ऐसी घुसपैठ की, ऐसी घुसपैठ की कि रसोई-रसोई और थाली-थाली तक घुसपैठ कर ली। और अब घर-घर में घुसपैठ करने के बाद, इतना भाव दिखाकर, मोदी जी की सरकार को ब्लैकमेल करने की और आखिरकार गिराने की कोशिश शुरू की जा रही है। खैर, हम इस विदेशी षडयंत्र को कामयाब नहीं होने दे सकते हैं। हम इस विदेशी फल का बायकॉट कर के, उसके होश ठिकाने लगा देंगे। विपक्षमुक्त बने न बने, पर हम पक्के देशभक्त नये इंडिया को टमाटर-मुक्त जरूर बना देंगे। बल्कि भारत को इस विदेशी फल से मुक्त कराने के लिए, 200 रुपए से ऊपर के रेट का शायद बेनिफिट भी ले सकते हैं। ज्यादातर पब्लिक की रसोइयां तो टमाटर मुक्त हो भी चुकी हैं, अब तो बस खाते-पीते मुट्ठीभर लोगों को टमाटर मुक्त कराना है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन वृक्षारोपण, गाय को हरा चारा, कबूतरों को दाना व पाठ्य सामग्री वितरण कर मनाया जन्मदिन भोपाल। पटवारी भर्ती महाघोटाले के विरोध में महाआंदोलन..