इंदौर से संगठनात्मक कार्यकर्ता सौरभ शर्मा की राज़नैतिक कार्यकर्ता के रूप में हुई नियुक्ति।भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष वैभव पवार, युवा मोर्चा प्रभारी व राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने विधानसभा प्रभारियों की नियुक्ति की है। लंबे समय से एबीवीपी में शास. होलकर विज्ञान महाविद्यालय इकाई अध्यक्ष से शुरुआत करने वाले दबंग छात्रनेता सौरभ शर्मा को महुँ विधानसभा भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रभारी बनाया है। इंदौर से लेकर महुँ तक इस नियुक्ति से युवाओं में जोश व हलचल है क्योंकि संगठन की कार्यप्रणाली का अनुसरण करने वाले सौरभ शर्मा ने अपनी हर ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया है। सौरभ शर्मा हाल ही नेपानगर नगरपालिका चुनाव में युवा मोर्चा चुनाव प्रभारी विवेक शर्मा के सहयोगी बनकर भी गये थे उनकी संगठनात्मक कार्यप्रणाली से उन्होंने अनेक गतिविधियों को प्रखर होकर क्रियान्वित किया है चाहे विद्यार्थियों की बात आए, सामाज व समरसता की बात आए या कोरोना में सहायता व गाँव- शहर में अलग- अलग समूह बनाकर दवाई, सामग्री, व अन्य सहायताओं की बात आए, आज़ादी के अमृत महोत्सव में भी उन्होंने कई कार्यक्रम किए। एबीवीपी में इकाई अध्यक्ष से शुरुआत करते हुए वे भाग सहसयोजक, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य (3 बार), महानगर सहमंत्री, महानगर महाविद्यालय प्रमुख, विभाग सयोजक आदि ज़िम्मेदारियों का दबंग छात्रनेता के रूप में निर्वहन किया।महानगर महाविद्यालय प्रमुख रहते सेल्फ़ी विथ कैंपस यूनिट अभियान ज़िला प्रमुख होने के नाते उन्होंने 180 परिषरों में कार्यकारिणीयों की घोषणा भी करवाई जिसका ज़िक्र एबीवीपी कीअखिल भारतीय बैठक में भी हुआ था। एबीवीपी से मुक्त होकर उन्होंने इंदौर सेवक ट्रस्ट की स्थापना की जिसमें शिक्षा, सेवा, रोज़गार पर केंद्रित होते हुए लगातार विद्यार्थियों, ज़रूरतमंदों,व सामाजिक समरसता पर कार्य कर रहे है। सौरभ शर्मा ने बताया कि हमें राष्ट्र उत्थान से बढ़कर कुछ नहीं दिखता संगठन जो ज़िम्मेदारी देगा उसे पूर्ण निष्ठा से निभाऊँगा और युवा मोर्चा की गतिविधियों को सभी की सहभागिता के साथ और ज़ोर देने का कार्य करूँगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दुर्गा मां का भव्य दरबार रहा बालाजी रामलीला का मुख्य आकर्षण. राम-रावण की सेना में भयंकर युद्ध के बाद हुआ रावण का दहन।
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