सुदामा नगर में विकास कार्यों की लंबित फाइलों पर जताई नाराजगी, अधिकारियों को मौके पर किया तलब, बाउंड्रीवॉल के टेंडर और वर्कऑर्डर की जांच के निर्देशइंदौर। प्रदीप चौधरी। शहर में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कड़ी नाराजगी जताई है। गुरुवार सुबह सुदामा नगर सेक्टर-डी के औचक निरीक्षण के दौरान विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें लंबे समय से लंबित होने की जानकारी सामने आने पर महापौर अधिकारियों पर भड़क उठे। उन्होंने दो टूक कहा, “आप लोग कागज-कागज खेलते रहते हो और यहां जनता परेशान होती रहती है। आपके कारण सरकार की छवि खराब होती है।” महापौर ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी और अधिकारियों की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित मामलों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पार्षद के साथ निरीक्षण करने पहुंचे महापौर, सामने आईं कई शिकायतेंमहापौर पुष्यमित्र भार्गव अपने नियमित सुबह के दौरे के दौरान स्थानीय पार्षद जीतू राठौर के साथ सुदामा नगर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और स्थानीय नागरिकों की समस्याएं सुनीं।निरीक्षण के दौरान ड्रेनेज लाइन के निर्माण कार्य में ठेकेदार की लापरवाही की शिकायतें सामने आईं। वहीं, सुदामा नगर ए सेक्टर स्थित बगीचे की बाउंड्रीवॉल निर्माण का टेंडर होने के बावजूद वर्कऑर्डर की फाइल लंबे समय से लंबित होने की जानकारी मिलने पर महापौर ने अधिकारियों से जवाब मांगा। टेंडर हो गया तो वर्कऑर्डर क्यों अटका? महापौर ने मांगा जवाबबाउंड्रीवॉल निर्माण की फाइल लंबित होने पर महापौर ने मौके से ही अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव सहित संबंधित अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्माण कार्य होना ही नहीं था तो उसका प्रस्ताव कैसे तैयार हुआ? टेंडर किस आधार पर जारी किया गया और वर्कऑर्डर की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ सकी?महापौर ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश देते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि फाइल किस स्तर पर और किन कारणों से अटकी रही। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।निगम की लंबित फाइलों की बनेगी सूची, एमआईसी में पेश होगी रिपोर्टमहापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नगर निगम के विभिन्न विभागों में विकास कार्यों से संबंधित ऐसी सभी फाइलों की सूची तैयार की जाए, जो बिना उचित कारण लंबे समय से लंबित हैं।उन्होंने कहा कि इन प्रकरणों की जांच कर रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत की जाए। इसके बाद संबंधित मामलों की रिपोर्ट महापौर परिषद (एमआईसी) में रखी जाए, ताकि जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। छोटी-छोटी समस्याओं के लिए महापौर को आना पड़े, यह गंभीर बातमहापौर भार्गव ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार नगर निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिदिन जनता की शिकायतों का सामना करना पड़ता है।उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान और फाइलों की स्थिति जानने के लिए महापौर को स्वयं मौके पर पहुंचना पड़े, तो यह संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देशमहापौर ने नगर निगम आयुक्त और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को लंबित विकास कार्यों की समीक्षा करने तथा देरी के कारणों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए।महापौर के इस सख्त रुख के बाद नगर निगम में लंबित विकास कार्यों और फाइलों के निस्तारण को लेकर प्रशासनिक हलचल बढ़ने की संभावना है। अब देखना होगा कि जांच में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है और लंबे समय से अटके विकास कार्यों को कब तक गति मिलती है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मुख्यमंत्री कार्यालय में राजेश कुमार हिंगणकर का कार्यकाल एक साल बढ़ा, 1 नवंबर 2026 से संविदा नियुक्ति को मिली मंजूरी बालाघाट से विदा हुए IPS आदित्य मिश्रा तो भावुक हुई जनता, बोले लोग—ऐसे एसपी बार-बार नहीं मिलते!