बिना ओपन टेंडर एवं बिना प्रतिस्पर्धा के अधिकारियों ने साठ-गांठ कर चहेती फर्म को सौंपा निर्माण का ठेका एक ही काम के लिये दो अलग-अलग तिथियों में जारी की गई फर्जी एवं कूटरचित संक्षिप्त निविदायें 28 सामग्रियों के कोटेशन पर सिर्फ 9 की सप्लाई पर बना दिया एल-1 । गौशाला, शेड, नलकूप और पानी की टंकी का नामो निशान नहीं, सिर्फ अर्द्धनिर्मित बाउंड्रीवाल खड़ी कर हड़प ली शासन की राशि। धरातल पर नहीं कोई दाचा, फिर भी मनरेगा पोर्टल पर फर्जी बिल चढ़ाकर रूपये 20,22,020 का करा लिया गया भुगतान डभौरा, रीवा। रीवा जिले के विभिन्न विकासखण्डों के अंतर्गत मनरेगा योजना के माध्यम से निराश्रित गौवंश की देख-रेख हेतु गौशाला निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया था। इस योजना के तहत डभौरा यूनिट-3 (नगर परिषद डभौरा) में गौशाला निर्माण का कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक-2 रीवा के माध्यम से कराया जाना था। इस संबंध में अधिकारियों द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर चहेते सप्लायर को लाभ पहुंचाने एवं बिना कार्य कराये फर्जी भुगतान प्राप्त करने की शिकायत प्राप्त हुई थी। सत्यापन के दौरान पाया गया कि डभौरा यूनिट क्रमांक-3 में 37.85 लाख की लागत से गौशाला, बछड़ा शेड, भूसा गोदाम, बीमार गाय शेड, नलकूप, 6000 लीटर की पानी टंकी, बाउंड्रीवाल एवं समतलीकरण आदि का निर्माण कार्य कराया जाना था। परन्तु ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग-2 के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा पारदर्शी ओपन टेंडर प्रक्रिया न अपनाकर अपने चहेते सप्लायर मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा (छतरपुर) को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आपराधिक षड्यंत्र रचा गया। जांच में पाया गया कि अधिकारियों द्वारा एक ही कार्य हेतु कार्यालयीन रिकार्ड में दो अलग-अलग तिथियों (03.12.2020 एवं 31.12.2020) की फर्जी एवं कूटरचित संक्षिप्त निविदायें तैयार की गई। इस निविदा हेतु न तो सप्लायर द्वारा कोई निविदा प्रपत्र शुल्क जमा किया गया और न ही अमानत राशि (EMD) जमा कराई गई। इसके अतिरिक्त 28 सामग्रियों की आपूर्ति हेतु निविदा बुलाई गई थी, जबकि सप्लायर द्वारा केवल 9 सामग्रियों का अधूरा दर पत्रक प्रस्तुत किया गया, जिसके बावजूद फर्जी तुलनात्मक पत्रक तैयार कर मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा को एल-1 घोषित कर कार्यादेश दे दिया गया। सप्लायर एवं अधिकारियों द्वारा साठ-गांठ कर मनरेगा पोर्टल पर कुल रूपये 27,38,578.22 रुपये के बिल प्रस्तुत किये गये, जिसमें से रूपये 2022020 रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया। जबकि भौतिक सत्यापन में मौके पर केवल एक 80X 25 फिट की अर्द्धनिर्मित बाउंड्रीवाल एवं एक अधूरा भवन ही निर्मित पाया गया, जो कि पूर्णतः उपयुक्तताविहीन है। निर्माण स्थल पर शेड, पानी की टंकी, नलकूप आदि कोई भी आवश्यक निर्माण नहीं कराये गये और बिना काम के ही राशि आहरित शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। उपरोक्त कृत्य हेतु आरोपीगण (1) राजेन्द्र सिंह धुर्वे तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-1 एवं प्रभारी कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-2 रीवा (2) डी.एस. आर्मो तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-2 रीवा (3) हिमांशु तिवारी तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग सीधी जिला सीधी (4) जगदीश सिंह राजपूत तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग मऊगंज (5) लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 प्रभारी निविदा शाखा संभाग क्रमांक-2 ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रीवा (6) दीनदयाल कुशवाहा प्रोप्राईटर मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा फर्म एवं अन्य संबंधित के विरूद्ध अपराध घटित किया जाना प्रमाणित पाये जाने से धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 (बी) भा.द.वि. एवं 7 (सी), 13 (1) ए, 13(2) भ्र.नि.अ. 1988 संशोधित अधिनियम 2018 के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मंदिरों में बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाने वाला अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ाया, 8 महिलाएं समेत 9 गिरफ्तार