एक नजर आपकी हमारी कलम पर ये प्यादे तेरी ये जुर्रत की तुमने हमारे दरबारी से जुबान लड़ाई तुम्हे पता नही हमारी हुकूमत है जी जहाँपनाह गुस्ताखी हो गई हम भूल गए कि हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में नही किसी की बादशाहत के अंदर काम कर रहे है, ✍🏼अमित सिंह परिहार… ये प्यादे तेरी ये जुर्रत की तुमने हमारे दरबारी से जुबान लड़ाई तुम्हे पता नही हमारी हुकूमत है , जी जहाँपनाह गुस्ताखी हो गई हम भूल गए कि हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में नही किसी की बादशाहत के अंदर काम कर रहे है, वर्दीधारी प्यादे और उनके सरदार हथेलियों की उंगलियों को अपने दांतों तले दबाए गिड़गिड़ाने लगे,मुआफी की दरख्वास्त करने लगे,लेकिन न शहजादे को तरस आया न ही बादशाह को ,जब आठ दस प्यादों की बलि सेनापति ने दी तब कही बादशाह उनके शहजादे , और दरबारियों के कलेजे को ठंडक पोहची । दोस्तो ऐसा ही कुछ चल रहा है देश और प्रान्त में , जिनकी सरकार है उस पार्टी के पदाधिकारी और उनसे जुड़े लोग खड़े खड़े आग मूत रहे है ,शासन प्रशासन के किसी कर्मचारी ने इन्हें कुछ बोल दिया हो या न भी बोला हो , ये झूठे आरोप लगा कर अपने जैसे लोगो की भीड़ जमा कर सिस्टम को जाम कर देते है , कल जो खेला एरोड्रम थाने पर हुआ वह इसी प्रकार का सत्ता के मद में चूर हो कर खेला गया , करेले को शक्कर में भी पकाओगे तो उसकी तासीर नही जाएगी , करेला ,करेला ही रहेगा, सीनियर पुलिस अधिकारी को गुंडा बोल रही भीड़ अपने गरेबान में भी झांक लेती जरा पता नही लोग यह क्यो भूल जाते है कि पुलिस रात दिन उनके लिए काम करती है सतत काम करते हुए कभी कभी न चाहते हुए भी पुलिस वालों से गलती हो जाती है उसके लिए बात का इतना बतंगड़ इसलिए बनाना की हम उनके खास है,और हमारे वह प्रदेश के मुखिया के खास है पुलिस भी न मूर्खता कर बैठती है यह नही समझती की खास और खासमखास लोगो पर भारतीय कानून लागू नही होते,लगता है शायद उतना दुरुपयोग अंग्रेजो ने भी पुलिस का नही किया होगा, जितना दुरुपयोग आज के सत्ताधीश कर रहे है, पुलिस को नीचा दिखा कर कोस कर संतुष्ट होने वाले यह नही जानते कि विपत्ति में घिरने पर भगवान के बाद पुलिस ही याद आती है रात दिन भगवान को पूजने वाले ने सात आठ पुलिस वालों की बलि ले कर पता नही क्या हासिल कर लिया है,खैर अहंकार का सिर आज नही तो कल नीचा होगा, जनता सब देख रही है,शायद पछता भी रही है,समय बदलने में देर नही लगती,खास और खासमखास कब आम हो जाते है,पता भी नही चलता अपने आस पास ही नजरे घुमा कर देख लीजिए दिख जाएंगे ,ईश्वर के घर देर है अंधेर नही ,मैं आम जनता की तरफ से पुलिस के आला अधिकारियों से कहना चाहूंगा कभी कभी अपने मातहतों की ढाल भी बन जाया कीजिये मातहतों के अच्छे कामो का जब आप श्रेय ले सकते है ,तो गलतियों का क्यो नही लेते ?याद रखिये गिरे हुए मनोबल की फौज आपको सफलता नही दिला सकती । जय हिंद जय भारत अमित सिंह परिहारपत्रकार इंदौरभोपाल Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन छतैनी गांव के पास दुअरा नदी में तैरता हुआ मिला एक शव, मौके पर पहुची पनवार पुलिस महंत सुरेश भगत जी की 41 दिवसीय खड़ी एवं मौन तपस्या हुई पूर्ण
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