नई दिल्ली। राम मंदिर निर्माण, मंदिर प्रबंधन और धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय ऑडिट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस से जुड़े नेताओं और पार्टी समर्थकों ने केंद्र सरकार पर राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पूर्व में मंदिरों की संपत्तियों और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के लिए विभिन्न राज्यों में कानूनी और संस्थागत व्यवस्थाएं बनाई गई थीं। उनका दावा है कि इन व्यवस्थाओं के तहत मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती रही है।विपक्षी दलों ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ पुराने भूमि सौदों और चंदे के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान और अन्य संसाधनों का स्वतंत्र एजेंसियों से ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।वहीं, केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने पहले भी इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी कार्य निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के तहत किए जा रहे हैं। ट्रस्ट का कहना रहा है कि मंदिर निर्माण का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित किया जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक स्थलों के प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दिनदहाड़े बैटरी चोरी, CCTV में कैद हुए ‘बंटी-बबली’ 24 घंटे में मोबाइल चोरी का खुलासा, अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार