तमिलनाडु।। तमिलनाडु के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में वर्ष 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। व्यापारी पी. जयराज (58 वर्ष) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (38 वर्ष) को मोबाइल फोन शॉप को लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करते हुए खुला रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस हिरासत में दोनों पिता-पुत्र की निर्मम यातना के बाद मौत हो गई। इस मामले में छह साल बाद अप्रैल 2026 में मदुरै की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुना दी।यह फैसला भारत में पुलिस हिरासत में यातना और हत्या के मामलों में “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (सबसे दुर्लभ मामलों में) श्रेणी में आता है। अदालत ने आरोपी पुलिसवालों को हत्या और सबूत नष्ट करने का दोषी ठहराया। साथ ही पीड़ित परिवार को 1.4 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया।रेवती की बहादुरी: सच्चाई की जीतइस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हेड कांस्टेबल एस. रेवती (लगभग 43 वर्षीय) ने। घटना वाली रात वे सथानकुलम थाने में ड्यूटी पर तैनात थीं। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मी जयराज और बेनिक्स को क्रूरता से पीट रहे थे। यातना इतनी भयावह थी कि पीड़ित चीख-चीखकर मदद मांग रहे थे – “अम्मा, दर्द हो रहा है! जाने दो! हमने कुछ नहीं किया!”रेवती ने बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट एम.एस. भरथिदासन के सामने बयान दर्ज कराते हुए कहा, “सर, मैं सब सच बताऊंगी… पूरा सच!” उन्होंने अपने दो छोटी बेटियों की सुरक्षा की गारंटी मांगी, क्योंकि पूरे पुलिस विभाग से धमकियां मिल रही थीं। फिर भी उन्होंने मिनट-दर-मिनट पूरी घटना का ब्योरा दिया – कैसे दोनों को लाठी-डंडों, जूतों और उपलब्ध किसी भी चीज से पीटा गया, यहां तक कि उनके निजी अंगों पर भी (भारी कदमों से चलना)stomp किया गया। उन्होंने बताया कि पीड़ितों को अपना खून साफ करने के लिए मजबूर किया गया था।रेवती की गवाही ने मामले को मजबूत आधार दिया। CBI की जांच में फोरेंसिक सबूत भी मिले, लेकिन उनकी निडर और विस्तृत गवाही (Testimony) ने अदालत को यकीन दिलाया कि यह सामान्य हिरासत मौत नहीं, बल्कि सुनियोजित क्रूरता थी। उन्होंने साथी पुलिसवालों के खिलाफ बयान देकर अपनी नौकरी, सुरक्षा और परिवार को खतरे में डाल दिया, फिर भी सच्चाई से समझौता नहीं किया।दोषी पुलिसकर्मीअदालत ने निम्नलिखित 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराकर फांसी की सजा सुनाई:– इंस्पेक्टर एस. श्रीधर– सब-इंस्पेक्टर पी. रघु (और अन्य सब-इंस्पेक्टर)– अन्य कांस्टेबल और कर्मी (जिनमें कुछ के नाम समाचारों में प्रमुखता से आए: बालकृष्णन आदि)ये सभी सथानकुलम थाने से जुड़े थे।महत्व और प्रतिक्रियायह फैसला पुलिस सुधार, जवाबदेही और हिरासत में यातना के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। पूरे देश में रेवती को “नारी शक्ति की मिसाल” और “सच्चाई की देवी” कहा जा रहा है। सोशल मीडिया पर उनकी बहादुरी की सराहना हो रही है – “एक महिला कांस्टेबल ने पूरी व्यवस्था को झुकाया।”रेवती की हिम्मत ने साबित किया कि सच्चाई के सामने कोई पद या दबाव टिक नहीं सकता। यह घटना उन हजारों कस्टोडियल मौतों की याद दिलाती है जहां न्याय नहीं मिल पाता, लेकिन यहां एक साधारण महिला पुलिसकर्मी की वजह से न्याय की जीत हुई।रेवती को सलाम! उनकी कहानी हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो सिस्टम के अंदर रहते हुए भी सही रास्ता चुनता है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन पति की हत्या कर ‘लूट’ का ड्रामा: प्रेमी संग मिलकर रची खौफनाक साजिश, 6 घंटे में खुला राज ओडिशा की जेलें बनीं ‘नरक’? CAG रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, महिला कैदियों की हालत बदतर