ठेकेदार से फाइनल बिल पास कराने के बदले 18,500 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए; रतलाम विशेष कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सुनाई सजा, जेल भेजा


रतलाम/जावरा (म.प्र.): भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई को मजबूती मिली है। जावरा नगरपालिका में मार्च 2021 में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) रहते हुए ठेकेदार को फाइनल भुगतान के बदले रिश्वत मांगने के मामले में रतलाम की विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने 19 फरवरी 2026 को कड़ा फैसला सुनाया।
तत्कालीन सीएमओ नीता जैन और लिपिक (सहायक राजस्व निरीक्षक) विजय सिंह शक्तावत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। दोनों को तुरंत जेल भेज दिया गया।


ट्रैप कार्रवाई का पूरा सच
मामले की शिकायत पेटी कांट्रेक्टर पवन भावसार ने की थी। जांच में पता चला कि फाइनल बिल पास कराने के बदले 26 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने 12 मार्च 2021 को जावरा नगरपालिका कार्यालय में ट्रैप लगाया।


कार्रवाई के दौरान बाबू विजय सिंह शक्तावत की जेब से 18,500 रुपये की रिश्वत राशि वाला लिफाफा जब्त किया गया। यह रकम सीएमओ नीता जैन को दी जानी थी। लोकायुक्त इंस्पेक्टर बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि सीएमओ नीता जैन द्वारा रिश्वत मांगने संबंधी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध थी, जो सबूत के तौर पर पेश की गई।
ट्रैप के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांच पूरी होने के बाद केस चला और अब लगभग 5 साल बाद कोर्ट ने दोषसिद्धि के साथ सजा सुनाई।


भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेश
यह फैसला लोकल स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। ठेकेदारों से रिश्वत लेकर विकास कार्यों में अनियमितता करने वाले अधिकारियों के लिए चेतावनी है। विशेष कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा।
यह घटना जावरा नगरपालिका के रिश्वतकांड को फिर से सुर्खियों में लाई है, जहां ट्रैप, ट्रांसफर और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार न्याय हुआ।