मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। राउत ने कहा कि अब उन्हें जनरल नरवणे की सुरक्षा की चिंता सता रही है और उनके साथ क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। इसलिए उनकी सुरक्षा तुरंत बढ़ाई जानी चाहिए।

राउत ने कहा, “अब मुझे मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है, उनके साथ क्या होगा, ये मैं कह नहीं सकता, उनकी सिक्योरिटी बढ़ जानी चाहिए। इससे पहले ऐसे कई हादसे हो चुके हैं, इसलिए सुरक्षा दी जानी जरूरी है।”

यह बयान लोकसभा में हालिया हंगामे के बाद आया है, जहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन लद्दाख गतिरोध पर जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ के अंशों का जिक्र करने की कोशिश की थी। सत्तापक्ष ने इसे अप्रकाशित सामग्री का हवाला देने पर आपत्ति जताई और सदन में हंगामा हुआ। राउत ने आरोप लगाया कि सरकार पूर्व आर्मी चीफ को निशाना बना सकती है, जैसा कि उन्होंने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ किया, जिन्हें चीन की मौजूदगी उजागर करने पर ‘देशद्रोही’ करार दिया गया।

राउत ने आगे कहा कि लद्दाख गतिरोध के दौरान जनरल नरवणे ने आदेश मांगे थे, लेकिन प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने फैसला लेने से परहेज किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलासा करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को खतरा हो सकता है। राउत ने मांग की कि पूर्व आर्मी चीफ को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे खुलासों के बाद राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका बढ़ जाती है।

यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, जहां विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहा है। जनरल नरवणे (2019-2022 तक सेना प्रमुख) की अप्रकाशित आत्मकथा में लद्दाख विवाद के दौरान निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं, जिसने राजनीतिक बहस को हवा दी है।

अभी तक केंद्र सरकार या रक्षा मंत्रालय की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले की आगे की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर टिकी हुई है।