भोपाल, प्रदीप चौधरी: मध्य प्रदेश में 27 अवैध मदरसों में 556 हिंदू बच्चों को कथित तौर पर बिना अनुमति कुरान और हदीस की शिक्षा देने का मामला गरमाया हुआ है। मुरैना और शिवपुरी जिलों में सामने आए इस मामले ने सांप्रदायिक बहस छेड़ दी है, जिसमें संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इसे “शिक्षा जिहाद” करार देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत कार्रवाई और मदरसों की जांच की मांग की है।
तिवारी ने कहा, “किसी को जबरन दूसरे धर्म का ज्ञान देना और मदरसों में बुलाकर पढ़ाना न्यायोचित नहीं है। ऐसे मदरसों पर ताले लगाए जाएंगे। हिंदू बच्चों को दूसरे धर्म की तालीम देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उनकी मांग है कि इन गतिविधियों की गहन जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
शिक्षा मंत्री का बयान: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नोटिस भेजा है। हम उसका अध्ययन करेंगे। हमारी मंशा है कि राइट टू एजुकेशन के तहत बच्चों को शिक्षा मिले, लेकिन यदि शिक्षा से भटकाव हो रहा है, तो सरकार इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा।
एनएचआरसी की कार्रवाई: एनएचआरसी ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव से 15 दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। आयोग के सदस्य प्रियंक कनूनगो ने कहा कि हिंदू बच्चों को मदरसों में दाखिला देकर कुरान पढ़ाना गंभीर मामला है। शिकायत में दावा किया गया है कि मुरैना (इस्लामनगर, जौरा, पोर्सा, अंबाह, कैलारास) और शिवपुरी (सबलगढ़) के इन मदरसों में कथित तौर पर संगठित धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग से जुड़ा रैकेट चल रहा है, जो किशोर न्याय अधिनियम 2015 और संविधान के अनुच्छेद 28(3) का उल्लंघन है।
विपक्ष का पलटवार: कांग्रेस नेता पी.सी. शर्मा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “शिक्षा विभाग सो रहा है। लव जिहाद और धर्मांतरण विरोधी कानूनों का दुरुपयोग सिर्फ वोट बैंक के लिए हो रहा है।” वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां कुछ यूजर्स ने इसे सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया, तो कुछ ने जांच की मांग को समर्थन दिया।
: मध्य प्रदेश में 27,000 से अधिक मदरसों में 5.56 लाख बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें गैर-मुस्लिम बच्चे भी शामिल हैं। यह मामला शिक्षा के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर सवाल उठा रहा है। सरकार ने अभी तक ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन एनएचआरसी की रिपोर्ट के बाद जांच तेज होने की संभावना है।
इस विवाद ने न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस को हवा दी है।
